नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑटोमेशन के कारण बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने की आशंकाओं के बीच भारत का सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र वित्त वर्ष 2025-26 में भी रोजगार देने वाला क्षेत्र बना रहा। केंद्र सरकार ने बुधवार को संसद में बताया कि इस दौरान आईटी सेक्टर में करीब 1.35 लाख नई नौकरियां जुड़ीं।इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक देश के आईटी उद्योग में कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 60 लाख हो गई है। यह दर्शाता है कि एआई और ऑटोमेशन के बढ़ते प्रभाव के बावजूद उद्योग में रोजगार के अवसर बने हुए हैं।
मंत्रालय ने नीति आयोग के आकलन का हवाला देते हुए स्वीकार किया कि एआई और ऑटोमेशन के कारण आईटी सेक्टर में बड़े स्तर पर कार्य संरचना हो रही है और कुछ नियमित तथा दोहराए जाने वाले कार्यों वाली नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
सरकार के अनुसार, जूनियर क्वालिटी एश्योरेंस और लेवल-1 आईटी सपोर्ट जैसी शुरुआती स्तर की भूमिकाएं ऑटोमेशन से सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी कहा कि नई तकनीकों के कारण विशेष कौशल वाले और अगली पीढ़ी की तकनीकों से जुड़े नए पदों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे कुल मिलाकर रोजगार सृजन जारी है।
उद्योग संगठन नैसकॉम ने भी पहले कहा था कि कंपनियों में हो रहे कर्मचारियों के पुनर्गठन का मुख्य कारण बदलते कारोबारी मॉडल और आर्थिक चक्र हैं, न कि तकनीकी क्षेत्र में रोजगार का स्थायी रूप से कम होना।
हाल ही में आई एडीपी रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 30 प्रतिशत कर्मचारियों को अपनी नौकरी सुरक्षित महसूस होती है। इस मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर और एशिया-प्रशांत (एपीएसी) क्षेत्र में पहले स्थान पर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में केवल 18 प्रतिशत लोगों ने अपनी नौकरी को सुरक्षित माना। वहीं भारत में नौकरी की सुरक्षा को लेकर धारणा काम के प्रकार के अनुसार अलग-अलग है। ज्ञान आधारित कार्य करने वाले 37 प्रतिशत कर्मचारियों ने अपनी नौकरी को सुरक्षित बताया, जबकि कुशल कार्य करने वालों में यह आंकड़ा 18 प्रतिशत और दोहराए जाने वाले कार्य करने वालों में 17 प्रतिशत रहा।
एक अन्य हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरेटिव एआई भारत के आईटी सेक्टर में बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म नहीं कर रहा है, बल्कि काम करने के तरीके में बदलाव ला रहा है। इससे उत्पादकता बढ़ रही है और कंपनियों की मांग ऐसे कर्मचारियों की ओर बढ़ रही है, जिनके पास तकनीकी और व्यावसायिक दोनों तरह के हाइब्रिड स्किल्स मौजूद हों।




