नई दिल्ली, 11 अप्रैल । भारत को वैश्विक फार्मा इनोवेशन हब बनाने के विजन के अनुरूप 'इंडिया फार्मा 2026' कार्यक्रम का उद्देश्य इस सेक्टर को केवल उत्पादन आधारित मॉडल से निकालकर वैल्यू और इनोवेशन आधारित वैश्विक ताकत में बदलना है। शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह पहल भारत के फार्मास्युटिकल सेक्टर के तेज बदलाव और विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाएगी।रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत फार्मास्युटिकल्स विभाग 13-14 अप्रैल को 'इंडिया फार्मा 2026' के 9वें संस्करण का आयोजन करने जा रहा है, जिसमें एफआईसीसीआई और इंडियन फार्मास्युटिकल एलायंस सहयोग कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल करेंगे।

मंत्रालय के अनुसार, यह सम्मेलन सेक्टर के विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करेगा, जिसमें भारत की फार्मा क्षमता, रिसर्च एवं डेवलपमेंट (आरएंडडी) और वैश्विक सप्लाई चेन की मजबूती पर विशेष फोकस रहेगा।

इस कार्यक्रम की थीम 'डिस्कवर इन इंडिया: लीफफ्रॉगिंग लाइफ-साइंसेज इनोवेशन' रखी गई है, जो हेल्थकेयर तक पहुंच बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने और वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में लाइफ साइंसेज की भूमिका को दर्शाती है।

भारत पहले से ही दुनिया को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयों की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी मजबूत आधार को आगे बढ़ाते हुए 'इंडिया फार्मा 2026' का लक्ष्य इस सेक्टर को एक नई दिशा देना है ताकि भारत वैश्विक स्तर पर इनोवेशन-ड्रिवन फार्मा पावरहाउस बन सके।

इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और फार्मा क्षेत्र के विशेषज्ञों की बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी। प्रमुख हस्तियों में मनोज जोशी, पुण्य सलिला श्रीवास्तव और विनोद के. पॉल शामिल हैं। इसके अलावा रेनू स्वरूप और शिवकुमार कल्याणरमन जैसे विशेषज्ञ भी इसमें हिस्सा लेंगे।

दो दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में 'स्टार्ट-अप शोकेस' जैसे विशेष सत्र के साथ कुल छह प्लेनरी सेशन आयोजित किए जाएंगे, जो फार्मा सेक्टर के भविष्य और नई संभावनाओं पर गहन चर्चा का अवसर प्रदान करेंगे।