नई दिल्ली। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम में बदलने के लिए पूरे उद्योग स्तर के दृष्टिकोण अपनाना होगा। यह बयान बुधवार को जारी आधिकारिक फैक्टशीट में दिया गया।सेमीकॉन इंडिया 2026 में उद्योग जगत के जुड़े लीडर्स ने कहा कि इकोसिस्टम के विभिन्न हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाले अलग-अलग संगठन अंततः एक ही साझा उद्देश्य की दिशा में काम कर रहे हैं और वह है भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र का निर्माण करना।

बयान में कहा गया कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। इसमें बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का विस्तार हो रहा है और वैश्विक कंपनियां भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। इससे यह इकोसिस्टम अभूतपूर्व गति से विकसित हो रहा है।

लीडर्स ने आगे कहा कि विकास के अगले चरण को अकेले किसी एक क्षेत्र के दम पर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, कंपोनेंट्स, मटेरियल्स, डिजाइन, पैकेजिंग और अंतिम उपयोग वाले एप्लिकेशन तेजी से एक-दूसरे पर निर्भर हो रहे हैं। ऐसे में सफलता केवल तकनीकी क्षमताओं पर ही नहीं, बल्कि उद्योग के विभिन्न हिस्सों के बीच सहयोग पर भी निर्भर करेगी।

चर्चा के दौरान टेक्नोलॉजी के विभिन्न क्षेत्रों के बीच बढ़ते तालमेल को प्रमुख विषय के रूप में सामने रखा गया। उद्योग विशेषज्ञों के हवाले से बयान में कहा गया, “चिप्स को अलग-थलग रहकर नहीं, बल्कि डिवाइस, उत्पादों और सिस्टम में उनके एकीकरण के जरिए मूल्य मिलता है। फैब्रिकेशन में प्रगति के लिए सहायक मटेरियल और उपकरणों की जरूरत होती है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग पैकेजिंग, टेस्टिंग और व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षमताओं पर निर्भर करती है।”

उद्योग की इस आपस में जुड़ी प्रकृति को देखते हुए पूरी वैल्यू चेन में मजबूत संपर्क और अधिक व्यवस्थित सहयोग की जरूरत है।

उद्योग जगत के नेताओं ने एक अधिक स्थायी कम्युनिटी मैकेनिज्म बनाने के विचार पर भी चर्चा की। इसका उद्देश्य लगातार संवाद को बढ़ावा देना, विभिन्न संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करना और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सामूहिक कार्रवाई को आगे बढ़ाना होगा।

विशेषज्ञों ने कहा कि मौजूदा संगठनों को अपनी ताकत के आधार पर एक साझा मंच तैयार करना चाहिए, जहां वे विभिन्न क्षेत्रों और वैल्यू चेन से जुड़े साझा मुद्दों पर मिलकर काम कर सकें।

चर्चा में व्यापक “सिलिकॉन टू सिस्टम्स” विजन को भी मजबूती मिली। इसके तहत डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस मिलकर एक मजबूत और अधिक लचीला इकोसिस्टम तैयार करते हैं।

सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया, जिनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल थीं। इन कंपनियों ने भारत के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में बढ़ती वैश्विक रुचि को प्रदर्शित किया।

कार्यक्रम के दौरान मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन, पैकेजिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी), लॉजिस्टिक्स और स्किलिंग के क्षेत्र में 56 एमओयू, रणनीतिक पहल और उद्योग संबंधी घोषणाएं भी हुईं।

प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाएं और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने और एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करने में मदद कर रहे हैं। सरकार ने सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के तहत 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें से सितंबर 2026 तक पांच कमर्शियल सेमीकंडक्टर यूनिट पहले ही परिचालन में आ चुकी हैं।