चंडीगढ़। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हरियाणा कैबिनेट ने सोमवार को 'मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी' (एमओटीपी) और 'टीचर्स ट्रांसफर पॉलिसी' (टीटीपी) को मंजूरी दी। इसका मकसद मानव संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना, कर्मचारियों की संतुष्टि बढ़ाना, प्रशासनिक दक्षता में सुधार करना और जन-सेवा वितरण को मजबूत करना है।नई पॉलिसी के तहत, ट्रांसफर के लिए कर्मचारियों की रैंकिंग 120-पॉइंट वाले नए स्कोरिंग सिस्टम से तय की जाएगी। उम्र को दिया जाने वाला वेटेज 75 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है।

एक नया पैमाना, "कैडर में अनुभव", 25 प्रतिशत वेटेज के साथ जोड़ा गया है, जबकि खास वजहों का वेटेज 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है, ताकि असली मुश्किलों का सामना कर रहे कर्मचारियों पर ज्यादा ध्यान दिया जा सके।

मान्यता प्राप्त गंभीर बीमारियों की लिस्ट में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, बेहचेट रोग और खास अंग प्रत्यारोपण (जैसे अग्न्याशय और बोन मैरो ट्रांसप्लांट) के मामलों को शामिल किया गया है। अहम बात यह है कि रिटायरमेंट के एक साल के अंदर किसी भी कर्मचारी या टीचर का ट्रांसफर उनकी साफ लिखित सहमति के बिना नहीं किया जाएगा।

कैबिनेट ने यमुना नगर और जगाधरी नगर परिषद के तहत आने वाली उन कॉलोनियों के बारे में भी निर्देशों को मंजूरी दी, जिनकी इमारतों को 1996 में रेगुलर किया गया था।

यह मामला 2021-22 में तब सामने आया जब शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने जीआईएस-मैप्ड प्रॉपर्टी डेटा से जुड़ा एक ऑनलाइन 'नो-ड्यूज सर्टिफिकेट' पोर्टल शुरू किया।

2005 से पहले रेगुलर की गई कॉलोनियों में सही लेआउट प्लान और 'खसरा' की जानकारी नहीं थी, जिससे सही मैपिंग करना नामुमकिन हो गया। नतीजतन, खाली या बिना मैप किए गए प्लॉट अपने आप "बिना मंजूरी वाले" कैटेगरी में आ गए।

इसके अलावा, कैबिनेट ने हरियाणा राज्य महिला आयोग (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को लागू करने की मंज़ूरी दी। इसके तहत हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 की धारा 3 (2) (बी) में संशोधन करके गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या पांच से बढ़ाकर सात कर दी गई है।