अयोध्या। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को आईएएनएस के साथ बातचीत में देश में गोरक्षा कानून न बनने और अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हिंदू समाज उन राजनीतिक दलों को सबक सिखाए, जो गाय माता के नाम पर केवल राजनीति करते हैं।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, "गाय माता की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। जिस देश में 100 करोड़ से ज्यादा हिंदू रहते हैं। उस देश में गायों को मारा, काटा और बेचा जाता है। आजादी से पहले सनातनियों से वादा किया गया था कि स्वतंत्र भारत में गोरक्षा के लिए कड़ा कानून बनाया जाएगा, लेकिन आज आजादी के 78 साल बाद भी ऐसा कोई कानून नहीं बन सका। दुर्भाग्यपूर्ण है कि अंग्रेजों के शासनकाल में गाय को महज एक 'जानवर' कहा जाता था और आज भी देश के कानून में उसे वही दर्जा प्राप्त है, जबकि हिंदू समाज में गाय को 'माता' माना जाता है। भारत की राजनीति चूंकि पूरी तरह 'वोट' पर टिकी है, इसलिए अब वे मतदाताओं से केवल उसी दल को वोट देने का संकल्प कराएंगे जो गोरक्षा की गारंटी देगा।"

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को विचार करने के लिए 6 से 8 महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा, "सभी पार्टियां गोलमाल बातें करती हैं। वे एक तरफ गाय माता को गुड़ चने का भोग लगाकर फोटो खिंचवाकर यह साबित करती है कि वे गोमाता के रक्षक है, लेकिन जब आंकड़े देखते हैं तो पता चलता है कि असल में वे भक्षक हैं।

उन्होंने बताया कि वे अभी अयोध्या आए हुए हैं। यहां पर हम गाय माता के समर्थकों से बातचीत करेंगे और उनसे गोरक्षा के लिए वोट देने का वादा करवाएंगे, और हमें इस पर भरोसा है, क्योंकि भारत की राजनीति वोट पर आधारित है। उन्होंने कहा, "हमने पॉलिटिकल पार्टियों को एक मौका दिया है कि उनके पास 6-8 महीने का समय है। इस समय वे गाय माता की रक्षा के बारे में सोचें।"

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए बताया कि जो दल सत्ता में होता है, जनता को सबसे ज्यादा उम्मीद उन्हीं से होती है। उन्होंने कहा, "पहले चुनाव के समय 'नरेंद्र मोदी को वोट मत दो, गोमाता को जीवन दो' नारा चलवाया गया था। देश की जनता ने इसी उम्मीद में पिछले 12 वर्षों में लगातार भाजपा को सत्ता की कमान सौंपी, लेकिन तीन बार सरकार बनने के बावजूद आज भी सवाल जस का तस खड़ा है क्या वाकई गोमाता को जीवन मिला।"

उन्होंने आगे राम मंदिर के खजाने और उसकी सुरक्षा से जुड़े विवादों पर बोलते हुए शंकराचार्य ने व्यवस्था पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब पूरी व्यवस्था या टीम में खोट है, तो केवल एक हिस्से को बदलकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता।

उन्होंने कहा, "जिस संगठन ने आज तक अपने कार्यालयों में प्रभु श्री राम की तस्वीर नहीं लगाई, वे आज राम मंदिर के प्रबंधन के सर्वेसर्वा बने बैठे हैं। यह स्थिति देश के करोड़ों सनातनी हिंदुओं के दिल में गहरे दर्द की तरह चुभ रही है। राम जन्मभूमि के मुकदमे के समय जिन लोगों ने कोर्ट से दूरी बनाई और इसे केवल आस्था का विषय बताया, आज वे ही मंदिर की पूरी व्यवस्था पर कब्जा जमाए बैठे हैं।

अयोध्या के साधु-संतों द्वारा मुख्यमंत्री की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम पर भरोसा जताए जाने के सवाल पर शंकराचार्य ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मुख्यमंत्री पर चोरों को बचाने और मुद्दे से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री ने अयोध्या आकर वादा किया था कि जांच के बाद सब कुछ साफ कर दिया जाएगा लेकिन दोबारा आने पर उन्होंने इस प्रगति पर बात करने के बजाय एक नया विवाद खड़ा कर दिया।"