धार। मध्य प्रदेश के धार भोजशाला मामले में हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद पूरे प्रदेश में जिस एक पुलिस अधिकारी के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह हैं धार के पुलिस कप्तान सचिन शर्मा। अपनी कड़क कार्यशैली, हाई अलर्ट सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के कारण 2014 बैच के आईपीएस अफसर सचिन शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाई कोर्ट के फैसले के बाद जहां सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिशें की जा रही थीं, वहीं एसपी सचिन शर्मा ने बेहद सख्त लहजे में साफ कर दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। उनके इस कड़े संदेश का असर यह हुआ कि बीते शुक्रवार को संवेदनशील माहौल के बावजूद पूरे जिले में शांति छाई रही और कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की खबर सामने नहीं आई।


"जिसे कानून को चुनौती देना है, वह प्रयास करके देख ले..."

भोजशाला मामले को लेकर मीडिया से बातचीत के दौरान एसपी सचिन शर्मा का एक बयान सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है। उन्होंने अफवाहबाजों और असामाजिक तत्वों को खुली चेतावनी देते हुए बेहद तल्ख लहजे में कहा था, "जो लोग हाई कोर्ट के फैसले का गलत अनुवाद कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। गुरुवार शाम तक समझाइश का समय था, लेकिन अब सिर्फ कानून का पालन होगा। अगर कोई कानून को चुनौती दे सकता है, तो वह प्रयास करके देख ले, प्रशासन पूरी तरह तैयार है।" इस बयान के बाद जनता के बीच संदेश गया कि धार में अब बिना अनुमति के पत्ता भी नहीं हिल सकता।


कमर में टायर बांधकर दौड़ते हैं एसपी, लोग कहते हैं 'रियल सिंघम'

आईपीएस सचिन शर्मा सिर्फ अपने कड़े फैसलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी हैरतअंगेज फिटनेस के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो जमकर वायरल हुआ, जिसमें वह अपनी कमर से भारी-भरकम टायर बांधकर मैदान में दौड़ लगाते नजर आ रहे हैं। इस फिटनेस रूटीन को देखकर लोग उन्हें 'रियल सिंघम' और 'आयरन आईपीएस' जैसे नामों से पुकार रहे हैं। वह रोजाना सुबह और शाम दोनों समय पुलिस लाइन ग्राउंड पर घंटों पसीना बहाते हैं, जिसमें ट्रक के भारी टायर पलटना, डिप्स लगाना और लोहे के डंबल लेकर रनिंग करना शामिल है। बताया जाता है कि वह रात को महज 4 घंटे की ही नींद लेते हैं और सुबह 5 बजे से पहले ग्राउंड पर पहुंच जाते हैं।


अनुशासन की मिसाल: बंगले पर नहीं, ऑफिस में ही करते हैं लंच

कर्तव्य के प्रति समर्पित सचिन शर्मा की वर्किंग स्टाइल भी बेहद अनुशासित है। वह ड्यूटी के दौरान समय बचाने के लिए अक्सर दोपहर के भोजन (लंच) के लिए अपने बंगले पर भी नहीं जाते, बल्कि ऑफिस में ही लंच करते हैं ताकि कानून व्यवस्था की मॉनिटरिंग में कोई कमी न रहे। इसके अलावा, खेल के प्रति उनका लगाव भी जगजाहिर है। ऑफिस का काम खत्म होने के बाद वह तनाव कम करने और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए अपने स्टाफ के साथ क्रिकेट की नेट प्रैक्टिस भी करते हैं। वे इससे पहले छतरपुर और उज्जैन जैसे बेहद संवेदनशील जिलों में भी बतौर एसपी अपनी सफल सेवाएं दे चुके हैं।


सड़कों पर उतरी अभेद्य सुरक्षा: हाथों में तिरंगा और डीजे पर भाईचारे के गीत

हाई कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को जुम्मे के दिन धार शहर में कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा के नेतृत्व में एक विशाल फ्लैग मार्च निकाला गया। इस मार्च की सबसे खास बात यह रही कि पुलिस बल के हाथों में तिरंगा था और डीजे पर भाईचारे व सौहार्द के गीत बज रहे थे, जिसने शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ जनता को शांति का संदेश भी दिया। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए धार जिले में करीब 2 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई, जिसमें आरएएफ (RAF), एसटीएफ (STF), एसएएफ (SAF) और अश्वरोही बल शामिल रहे। इसके साथ ही वज्र और योद्धा जैसे अत्याधुनिक सुरक्षा वाहनों, ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए पूरे शहर की निगरानी की गई।


महाआरती और शांतिपूर्ण विरोध के बीच कायम रहा सौहार्द

प्रशासनिक मुस्तैदी का ही परिणाम था कि शुक्रवार को भोजशाला परिसर में जहां सैकड़ों हिंदू श्रद्धालुओं ने फूलों और रंगोली से सजे परिसर में शांतिपूर्वक 'महा आरती' और पूजा-अर्चन किया, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस फैसले पर असंतोष जताते हुए अपने-अपने घरों में जुम्मे की नमाज अदा की और हाथों पर काले बैंड बांधकर पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराया। मुस्लिम प्रतिनिधियों का कहना है कि वे हाई कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। इस प्रकार, धार पुलिस और प्रशासन की सूझबूझ से दोनों पक्षों के बीच सौहार्द कायम रहा।