भोपाल। मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से दो बड़ी और महत्वपूर्ण खबरें सामने आ रही हैं। एक तरफ सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की तकनीकी चूक के कारण हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों पर पदावनति (डिमोशन) का खतरा मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ साइबर अपराध का नया रूप 'बॉस स्कैम' तेजी से पैर पसार रहा है।


1. MP में GAD की चूक: 2026 की DPC गायब, हजारों प्रभारियों के डिमोशन की आशंका

मध्य प्रदेश में पदोन्नति नियमों के क्रियान्वयन में हुई एक बड़ी चूक हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। GAD द्वारा जारी पदोन्नति नियम 2025 के तहत पदोन्नति प्रक्रिया 2025 से शुरू होनी थी, लेकिन अदालती मामलों के कारण यह वर्ष 2026 में प्रारंभ हो पाई।


मुख्य समस्याएं और प्रशासनिक खामियां:

वर्ष 2026 की DPC गायब: विभाग अभी भी 31 दिसंबर 2025 की स्थिति के आधार पर ही पदोन्नतियां कर रहे हैं क्योंकि GAD ने कोई संशोधित दिशानिर्देश जारी नहीं किए। नियमानुसार अगली विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) वर्ष 2027 के लिए होगी। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2026 की DPC का कोई अस्तित्व ही नहीं बचा।


एक वर्ष में दो DPC का प्रावधान नहीं: मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम 2025 के अंतर्गत एक ही वर्ष में दो अलग-अलग वर्षों की नियमित DPC करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।


प्रभारी अधिकारियों पर गाज: इस स्थिति के कारण वर्षों से उच्च पदों का प्रभार संभाल रहे हजारों अधिकारी पदावनत (Demote) हो सकते हैं, जिससे प्रशासनिक कर्मचारियों का मनोबल गिरेगा। वहीं, सेवानिवृत्त अधिकारियों को तो पदोन्नति का लाभ मिल सकता है, लेकिन कार्यरत प्रभारी वंचित रह जाएंगे।


विशेषज्ञों का सुझाव व समाधान:

विशेषज्ञों का मानना है कि GAD को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने से पहले नियमों में संशोधन करना चाहिए था। इसमें यह प्रावधान जोड़ा जाना चाहिए था कि विशेष DPC के तहत 31 दिसंबर 2026 तक की रिक्तियों पर विचार किया जाए। वर्तमान स्थिति में अब 'रिव्यू DPC' ही अधिकारियों-कर्मचारियों को राहत देने का एकमात्र जरिया बचती है।


2. सावधान! मध्य प्रदेश में आया 'बॉस स्कैम': राज्य साइबर सेल ने जारी किया अलर्ट

मध्य प्रदेश में साइबर ठगों ने धोखाधड़ी का एक नया और खतरनाक तरीका निकाला है, जिसे 'बॉस स्कैम' (Boss Scam) नाम दिया गया है। मध्य प्रदेश राज्य साइबर सेल ने इस नए ऑनलाइन फ्रॉड को लेकर आम जनता और नौकरीपेशा लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है।


कैसे काम करता है 'बॉस स्कैम'?

प्रोफाइल ट्रैकिंग: ठग सबसे पहले सोशल मीडिया (जैसे LinkedIn, Facebook) के माध्यम से यह पता लगाते हैं कि पीड़ित किस कंपनी या संस्थान में काम करता है और उसका वरिष्ठ अधिकारी (बॉस/सीनियर) कौन है।


फर्जी प्रोफाइल: इसके बाद बदमाश कंपनी के बॉस/अधिकारी के नाम और फोटो का इस्तेमाल करके एक फर्जी वॉट्सऐप (WhatsApp) अकाउंट बनाते हैं।


भरोसा जीतना: पीड़ित को मैसेज भेजा जाता है कि—"यह मेरा नया/व्यक्तिगत नंबर है, इसे सेव कर लें।" कुछ दिनों तक सामान्य बातचीत करके पीड़ित का विश्वास जीता जाता है।


ठगी को अंजाम देना: भरोसा बनने के बाद ठग आपातकालीन स्थिति (Emergency), बिजनेस डील, गिफ्ट कार्ड या फर्जी लिंक भेजकर तत्काल भुगतान (Payment) करने को कहते हैं और कर्मचारी ठगी का शिकार हो जाता है।


बचाव के उपाय:

अपने किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से नए नंबर से आए मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें।

कोई भी वित्तीय लेनदेन (Payment) करने से पहले अधिकारी के पुराने/आधिकारिक नंबर पर कॉल करके पुष्टि अवश्य करें।

अनजान लिंक या क्यूआर कोड पर क्लिक/स्कैन न करें।