भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के शासन-संधारित (सरकारी नियंत्रण वाले) सभी 22,098 मंदिरों एवं देवस्थानों की चल-अचल संपत्ति का एकीकृत और पारदर्शी डिजिटल डेटाबेस (Digital Database) तैयार करने का बड़ा फैसला लिया है। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर उठती रही मांगों के बीच यह ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है।


इस पहल के तहत महाकाल मंदिर से लेकर ओरछा के श्रीराम राजा सरकार मंदिर तक—प्रदेश के सभी प्रमुख व शासन-संधारित मंदिरों की जमीन, भवन, आय-व्यय और पुजारियों का पूरा ब्योरा डिजिटल पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा।


डिजिटल कुंडली में क्या-क्या दर्ज होगा?

मंदिरों के इस एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड में निम्नलिखित जानकारियां दर्ज की जाएंगी: मंदिर के नाम दर्ज कृषि व गैर-कृषि भूमि का रकबा, खसरा नंबर और निर्मित भवन/परिसर का क्षेत्रफल। मंदिर की संपत्ति पर किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे, अतिक्रमण या न्यायालय में लंबित मुकदमों/विवादों की रियल-टाइम स्थिति। मंदिर के पुजारी का नाम, नियुक्ति स्थिति और मंदिर की चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा। आने वाले समय में यह पूरी जानकारी सरकारी पोर्टल के माध्यम से सार्वजनिक की जाएगी ताकि कोई भी इसे देख सके।


पायलट प्रोजेक्ट: उज्जैन और ग्वालियर से शुरुआत

संपत्तियों के डिजिटलीकरण की शुरुआत राज्य स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट (Pilot Project) के रूप में दो प्रमुख धार्मिक व प्रशासनिक जिलों से की जा रही है:


उज्जैन: जिले के 2,536 शासन-संधारित मंदिरों का रिकॉर्ड सबसे पहले डिजिटल होगा।

ग्वालियर: जिले के 1,165 मंदिरों को प्रारंभिक चरण में शामिल किया गया है।


इन दोनों जिलों में सफलता के बाद प्रदेश के शेष सभी जिलों के 22,098 मंदिरों को इस डिजिटल डेटाबेस से जोड़ा जाएगा।


मंदिरों की संपत्ति और महाकाल मंदिर के आंकड़े

मध्य प्रदेश में लगभग 1,320 मंदिर ऐसे हैं, जिनमें से प्रत्येक के पास 10 एकड़ से अधिक कृषि भूमि है। इन मंदिरों के नाम कुल मिलाकर करीब 4,500 हेक्टेयर कृषि भूमि दर्ज है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की वार्षिक आय लगभग ₹142 करोड़ रही, जबकि मंदिर प्रबंध समिति के पास करीब ₹472 करोड़ की एफडी (Fixed Deposit) जमा है।


डिजिटलाइजेशन से क्या होगा फायदा?

मंदिरों की संपत्तियों और दान/चढ़ावे के रिकॉर्ड में पूर्ण पारदर्शिता आएगी और वित्तीय अनियमितताओं पर रोक लगेगी। सरकारी पोर्टल पर भू-अभिलेख दर्ज होने से भू-माफियाओं द्वारा मंदिर की जमीनों पर अवैध कब्जे और फर्जी खरीद-बिक्री की निगरानी आसान हो जाएगी। राज्य सरकार को मंदिरों की भूमियों के लीज, प्रबंधन और आय के सही उपयोग के लिए दीर्घकालिक नीति बनाने में मदद मिलेगी।