सागर, जीशान खान। रहली तहसील के ग्राम किशनगढ़ में एक परिवार ने दहेज प्रथा के खिलाफ अनूठी पहल कर समाज के सामने उदाहरण पेश किया है। यहां एक सगाई समारोह में दूल्हे पक्ष ने 1.21 लाख रुपए की नकद राशि लेने से इनकार कर दिया और केवल 11 रुपए व नारियल लेकर विवाह की रस्में निभाईं।


यह विवाह 26 अप्रैल को गुड्डू पटेल और साधना पटेल के बीच संपन्न हुआ। शादी से पहले आयोजित लगुन (फलदान) कार्यक्रम में दुल्हन पक्ष की ओर से परंपरा अनुसार नकद राशि और अन्य सामान दूल्हे के घर लाया गया था। लेकिन जैसे ही नगद राशि दूल्हे को दी गई, उसने उसे लेने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद दूल्हे के पिता कमलेश पटेल ने केवल 11 रुपए और एक नारियल स्वीकार किया और शेष पूरी राशि वापस लौटा दी। इस फैसले से मौके पर मौजूद लोग भी आश्चर्यचकित रह गए।


दुल्हन साधना के पिता ऑटो रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं और उनकी तीन बेटियां हैं। ऐसे में दूल्हे पक्ष का यह निर्णय उनके लिए बड़ी राहत लेकर आया।


कमलेश पटेल ने बताया कि उन्होंने पहले से ही तय कर रखा था कि वे अपने बेटे की शादी में दहेज नहीं लेंगे। उनका मानना है कि दहेज की वजह से कई अच्छे परिवार रिश्तों से पीछे हट जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे बहू नहीं, बेटी घर लाना चाहते थे।


उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने राशि लौटाई, तो दुल्हन के पिता को लगा कि शायद वे किसी बात से नाराज हैं। लेकिन जब उन्हें असली वजह बताई गई, तो वे भावुक हो गए।


कमलेश पटेल ने कहा शादी कोई सौदा नहीं, बल्कि दो परिवारों का पवित्र रिश्ता है। अगर यह पैसा उनकी छोटी बेटी की पढ़ाई में काम आए, तो उससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इस पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है और लोग इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं।