जबलपुर। जबलपुर रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में लंबे समय से हो रही चोरी की वारदातों के पीछे एक बड़े संगठित गिरोह का हाथ सामने आया है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने 70 से अधिक नाबालिग बच्चों के जरिए चोरी का नेटवर्क चलाने वाले मुख्य सरगना को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया आरोपी 12 से 16 वर्ष के गरीब बच्चों को यूट्यूब से चोरी के पैंतरे सिखाकर अपराध के दलदल में धकेलता था।


पैर खराब होने पर खड़ा किया नाबालिगों का नेटवर्क

आरपीएफ पोस्ट प्रभारी राजीव खरब के मुताबिक, बेलबाग निवासी 40 वर्षीय नीतेश कुमार उर्फ नीतू खुद लंबे समय से ट्रेनों में चोरी, लूट और आर्म्स एक्ट के मामलों में संलिप्त रहा है। करीब दो साल पहले दायां पैर खराब होने के कारण जब वह खुद वारदात करने में असमर्थ हो गया, तो उसने भीख मांगने के बाद नाबालिगों को जरिया बनाकर नया गिरोह तैयार किया। रेलवे स्टेशन पर 10 साल वेंडर रहने के कारण उसे ट्रेनों के आवागमन और सुरक्षा खामियों की पूरी जानकारी थी।


यूट्यूब से तरीके सीखकर देता था दो माह की ट्रेनिंग

नीतेश हनुमानताल, मदार टेकरी, सिद्धबाबा पहाड़ी और रेलवे ट्रैक किनारे की कच्ची बस्तियों में कचरा बीनने वाले गरीब परिवारों के बच्चों को पैसों का लालच देकर फंसाता था। इसके बाद वह यूट्यूब पर चोरी और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के वीडियो देखकर बच्चों को लगभग दो महीने तक प्लेटफॉर्म, वेटिंग रूम और आउटर पर ट्रेन धीमी होते ही सामान उड़ाने की बाकायदा ट्रेनिंग देता था।


18 साल की उम्र होते ही गिरोह से बाहर

जांच में सामने आया कि नीतेश गिरोह में केवल नाबालिग लड़कों को ही रखता था, ताकि पकड़े जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके। जैसे ही किसी लड़के की उम्र 18 साल पूरी होती, उसे गैंग से निकाल दिया जाता था। पूर्व में इसी गिरोह से निकले हर्ष सिंह (जिस पर 18 से अधिक चोरी के केस दर्ज हैं) की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को नीतेश के इस पूरे नेटवर्क का सुराग मिला था। आरोपी को गिरफ्तार कर आरपीएफ अब गिरोह से जुड़े अन्य संपर्कों और चोरी के माल के खरीदारों की पड़ताल कर रही है।