दमोह, राजेन्द्र तिवारी। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बुधवार सुबह जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान मरीजों ने उनके सामने ही अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी, जिस पर कलेक्टर ने सिविल सर्जन को कड़ी फटकार लगाई और कई सुधारात्मक निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान ओपीडी में डॉक्टरों की संख्या कम पाई गई, वहीं कई कर्मचारी अनुपस्थित मिले। अस्पताल के मुख्य गेट पर स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की कमी भी सामने आई। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिए कि 24 घंटे गेट पर स्ट्रेचर या व्हीलचेयर उपलब्ध रहनी चाहिए, ताकि मरीजों को परेशानी न हो। मरीजों और उनके परिजनों ने इलाज में लापरवाही की शिकायत की। गर्भवती महिलाओं ने बताया कि अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन होने के बावजूद जांच नहीं हो रही, जिससे उन्हें बाहर पैसे खर्च कर जांच करानी पड़ रही है। इस पर कलेक्टर ने तत्काल विशेषज्ञ बुलाकर मशीन चालू कराने के निर्देश दिए।


निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि सुरक्षा, सफाई कर्मियों और लॉन्ड्री कर्मचारियों को पिछले पांच महीनों से वेतन नहीं मिला है। कलेक्टर ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई और भोपाल में हेल्थ कमिश्नर से बात कर जल्द भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अनुपस्थित कर्मचारियों की अटेंडेंस रिपोर्ट मंगाकर उनके वेतन काटने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी कि यदि भविष्य में निरीक्षण के दौरान फिर अनियमितताएं मिलीं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति और मरीजों के साथ बेहतर व्यवहार सुनिश्चित किया जाए, ताकि सभी को समय पर इलाज मिल सके।