ग्वालियर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर प्राचीन काल से वीरता, विद्वता और कला का केंद्र रही है और ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ यह शहर शिक्षा के नए हब के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार भी होता है।


मुख्यमंत्री भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ आधुनिक विज्ञान और तकनीक का समन्वय करेगा, जिससे ऐसे नागरिक तैयार होंगे जो ज्ञानवान, चरित्रवान और समाज के प्रति जिम्मेदार हों। उन्होंने नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में विद्यार्थियों के कौशल, दक्षता और चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सांदीपनि विद्यालयों जैसे प्रयास इसी दिशा में किए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा को मजबूत करने के लिए कई नवाचार किए गए हैं। अब विश्वविद्यालयों में कुलपति को ‘कुलगुरु’ कहा जा रहा है और दीक्षांत समारोह भारतीय वेशभूषा में आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही हर साल नियमित रूप से दीक्षांत समारोह भी सुनिश्चित किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में तात्या टोपे, टंट्या भील और रानी अवंतीबाई लोधी के नाम पर विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं और सभी 55 जिलों में पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रहे RSS के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी ने कहा कि वास्तविक विकास वही है, जिसमें मनुष्य और परिवेश दोनों का संतुलित विकास हो। उन्होंने रोजगारपरक शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण पर जोर देने की बात कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संघचालक अशोक पांडे ने कहा कि कोई भी देश केवल सैन्य शक्ति से महान नहीं बनता, बल्कि शिक्षा और संस्कार ही उसे मजबूत बनाते हैं।


उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य श्रेष्ठ जीवन मूल्यों की स्थापना करना है और ऋषि गालव विश्वविद्यालय इसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा। मध्य भारत शिक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र बांदिल ने बताया कि विश्वविद्यालय में आधुनिक सुविधाओं के साथ रोजगारपरक पाठ्यक्रम चलाए जाएंगे। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा, जीवन दर्शन और सांस्कृतिक विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 18 जुलाई 2027 (गुरु पूर्णिमा) से कक्षाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है और विश्वविद्यालय तीन वर्षों में बनकर तैयार होगा। कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और शिक्षा समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।