धार। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को ऐतिहासिक नगरी धार पहुंचे, जहाँ उन्होंने पावन गंगा दशहरा के पावन अवसर पर ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक भोजशाला परिसर पहुंचकर मां वाग्देवी (देवी सरस्वती) के दर्शन कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने धारवासियों को एक बड़ी सौगात देते हुए भोजशाला क्षेत्र में भव्य 'सरस्वती लोक' और 'भोज शोध संस्थान' स्थापित करने का ऐतिहासिक ऐलान किया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत 'जय जय सियाराम' के गगनभेदी उद्घोष के साथ की और कहा कि लगभग साढ़े सात सौ साल के कड़े संघर्ष और कानूनी प्रक्रिया के बाद भोजशाला को लेकर जो सुखद निर्णय आया है, उसके लिए धार की जनता और तमाम संघर्षकर्ता बधाई के पात्र हैं। उन्होंने सौभाग्य व्यक्त किया कि गंगा दशहरा के पावन पर्व पर उन्हें साक्षात मां वाग्देवी के चरणों में शीश नवाने का अवसर प्राप्त हुआ है।
भोजशाला परिसर में आयोजित मुख्य गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोजशाला आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले तीन परम बलिदानियों—लक्ष्मण सिंह पंचघाटी, बनसिंह अमझेरा और अंतर सिंह के सर्वोच्च बलिदान को याद किया। सीएम ने तीनों अमर बलिदानियों के परिजनों को ससम्मान मंच पर बुलाकर शाल-श्रीफल से सम्मानित किया और उनकी स्मृति में उपस्थित जनसमुदाय के साथ दो मिनट का मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने तीनों शहीद परिवारों के लिए शासन की ओर से 5-5 लाख रुपये की विशेष आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने की बड़ी घोषणा की। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर, प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और क्षेत्रीय विधायक नीना विक्रम वर्मा सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे।
मंच से जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा भगवान श्रीराम और हमारी सांस्कृतिक विरासत के नाम पर समाज को आपस में लड़ाने और बांटने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि वर्ष 2026 की बसंत पंचमी के ऐतिहासिक पड़ाव के बाद से अब धार का इतिहास और इसकी पहचान तेजी से बदलने लगी है। उन्होंने स्वीकार किया कि अतीत की अनदेखी के कारण धार विकास की मुख्य दौड़ में थोड़ा पीछे जरूर रह गया था, लेकिन अब भोजशाला क्षेत्र की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को एक नई वैश्विक दिशा दी जाएगी, जिसमें 'भोजशाला लोक' (सरस्वती लोक) और 'भोज शोध संस्थान' मील का पत्थर साबित होंगे।
भोजशाला के कार्यक्रम को संपन्न करने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला सीधे शहर के मोतीबाग चौक पहुंचा। यहाँ आयोजित भव्य विकास समारोह में मुख्यमंत्री ने धार शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए करोड़ों रुपये की लागत वाले विभिन्न विकास व निर्माण कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इसके साथ ही उन्होंने मंच से ही शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को हितलाभ और सहायता राशि के चेक भी वितरित किए। इसके उपरांत, मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रसिद्ध देवी सागर तालाब पहुंचे, जहाँ उन्होंने प्रदेशव्यापी ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ और ‘गंगा दशहरा’ पर्व के अंतर्गत खुद फावड़ा उठाकर श्रमदान किया। उन्होंने आम जनता से जल स्रोतों को बचाने की अपील करते हुए कहा कि संपूर्ण मध्य प्रदेश में हमारी प्राचीन जल संरचनाओं, कुओं, बावड़ियों और तालाबों के पुनरुद्धार के लिए करोड़ों रुपये की लागत से युद्धस्तर पर जल संरक्षण के कार्य किए जा रहे हैं, जिसमें जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुबह से ही भोजशाला परिसर और शहर के प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में भाजपा नेता, कार्यकर्ता और श्रद्धालु भी मौके पर मौजूद रहे। एसपी सचिन शर्मा के नेतृत्व में पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए धार शहर में विशेष ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया। कई प्रमुख मार्गों पर भारी एवं मध्यम वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया था। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की।

