नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा NEET में हुए कथित पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों को लेकर देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर आज भारी बवाल और सियासी घमासान देखने को मिल रहा है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के बैनर तले आयोजित इस विशाल और आक्रामक प्रदर्शन में देश भर से आए हजारों छात्र, बेरोजगार युवा और उनके अभिभावक शामिल हुए हैं, जो हाथों में तख्तियां लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार गगनभेदी नारेबाजी कर रहे हैं। इस पूरे आंदोलन की कमान संभाल रहे सीजेपी के 30 वर्षीय फाउंडर अभिजीत दीपके शनिवार सुबह ही अमेरिका से दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरे और वहां से किसी अन्य स्थान पर जाने के बजाय सीधे जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के मंच पर जा पहुंचे, जिससे आंदोलनकारियों का जोश दोगुना हो गया है।


इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस की तरफ से भी एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, 6 जून 2026 को जंतर-मंतर पर इस बड़े प्रदर्शन के आयोजन को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' की तरफ से अब तक कोई भी आधिकारिक एप्लीकेशन या लिखित परमिशन नहीं मांगी गई थी। इसके बावजूद, राजधानी के अति संवेदनशील इलाके में अचानक उमड़ी हजारों की अनियंत्रित भीड़ और संभावित सुरक्षा खतरों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने तत्परता दिखाई है। नई दिल्ली और जंतर-मंतर के आसपास के तमाम रास्तों पर कानून-व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने के लिए 1000 से अधिक अतिरिक्त पुलिस जवानों, अर्धसैनिक बलों और वज्र वाहनों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।


इस प्रदर्शन को रोकने और नियंत्रित करने के लिए 'सेव इंडिया फाउंडेशन' नामक एक गैर सरकारी संगठन (NGO) ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। इस जनहित याचिका में यह गंभीर दावा किया गया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रदर्शनकारियों को दिल्ली एयरपोर्ट की व्यवस्थाएं बाधित करने, साथ ही प्रदर्शन के दौरान अपने पास पेपर स्प्रे (मिर्च स्प्रे) और लाठी-डंडे रखने के लिए लगातार उकसाया जा रहा है। एनजीओ ने अदालत से मांग की थी कि पुलिस इस भीड़ पर नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम करे और जंतर-मंतर पर होने वाली इस सभा को पूरी तरह रोकने या किसी अन्य सुदूर स्थान पर स्थानांतरित करने पर विचार करे। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता के बावजूद इस याचिका पर किसी भी प्रकार की तत्काल सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रदर्शन का रास्ता साफ हो गया।



मुख्य न्यायाधीश (CJI) के एक तीखे बयान के विरोध से हुआ था 'कॉकरोच जनता पार्टी' का जन्म

इस अनोखे नाम वाली पार्टी की स्थापना की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। दरअसल, विगत 15 मई को भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा था कि 'कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ आरटीआई (RTI) व अन्य तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं और हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।' युवाओं के लिए इस्तेमाल किए गए इस 'कॉकरोच' शब्द से आहत होकर, इसके अगले ही दिन 16 मई को अमेरिका में रह रहे 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर प्रतीकात्मक रूप से 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी, जो युवाओं के गुस्से के कारण देखते ही देखते एक बड़े जमीनी आंदोलन में तब्दील हो गया।


'आप' के पूर्व सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं अभिजीत, बोले- "मजाक अब बहुत आगे निकल चुका है"

मूल रूप से महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले CJP फाउंडर अभिजीत दीपके पेशे से एक कुशल डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्होंने पुणे से पत्रकारिता की उच्च शिक्षा हासिल की है और वर्तमान में अमेरिका की प्रतिष्ठित बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत का पुराना राजनीतिक अनुभव भी रहा है, वे वर्ष 2020 से 2022 तक दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) के मुख्य सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रह चुके हैं और 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में 'आप' के लिए वायरल मीम आधारित ऑनलाइन चुनाव प्रचार सामग्री तैयार करते थे। अपने इस आंदोलन पर बात करते हुए अभिजीत ने हाल ही में एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि 'यह आंदोलन सोशल मीडिया पर एक मजाक और तंज के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह मजाक की सीमाओं से बहुत आगे निकल चुका है। देश के करोड़ों युवाओं की बेरोजगारी और वर्तमान सरकारी व्यवस्था से उपजी गहरी निराशा ने आज इसे इतना बड़ा रूप दे दिया है।'


क्या राजनीतिक दल बनेगी CJP? चुनाव चिन्ह और करोड़ों की फंडिंग को लेकर प्रवक्ता का बड़ा दावा

इस आंदोलन के भविष्य और इसकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर वर्तमान में तीन बड़े सवाल तैर रहे हैं। पहला सवाल यह कि क्या यह एक रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी बनेगी? शुरुआत में अभिजीत ने इससे इनकार किया था, लेकिन जिस तरह अब जमीन पर प्रवक्ता नियुक्त कर बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस की जा रही हैं, उससे इसके राजनीतिक दल बनने के साफ संकेत मिलते हैं। दूसरा सवाल इसके चुनाव चिन्ह को लेकर है कि क्या इन्हें 'कॉकरोच' निशान मिल सकता है? चुनाव आयोग के नियम 1968 के तहत किसी भी नई पार्टी को केवल 'फ्री सिंबल लिस्ट' (जैसे लैपटॉप, टीवी, ताला-चाबी) से ही चुनाव चिन्ह मिलता है, जिसमें फिलहाल कॉकरोच शामिल नहीं है। वहीं, सबसे बड़े तीसरे सवाल यानी आंदोलन की फंडिंग पर CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने 3 जून को कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि 'हमारे पीछे जो पार्टी का बैनर लगा है वह महज 200 रुपये का है और छात्र यहां अपने खर्च पर आ रहे हैं, इसलिए हमें किसी गुप्त फंडिंग की जरूरत ही नहीं है। फंडिंग का यह झूठा नैरेटिव सिर्फ हमारे इस पवित्र छात्र आंदोलन को भटकाने के लिए विरोधी ताकतों द्वारा खड़ा किया जा रहा है।'