बीजिंग, 26 मई । भारत ने मंगलवार को क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी समेत अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक के दौरान क्वाड समूह ने महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग का विस्तार किया और क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर नया फ्रेमवर्क का ऐलान किया गया है। वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय ने क्वाड का विरोध किया है।चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "देशों के बीच सहयोग इलाके की शांति, स्थिरता और खुशहाली के लिए अच्छा होना चाहिए और किसी तीसरे पक्ष को टारगेट नहीं करना चाहिए। हम खास गुट बनाने या गुटों के बीच टकराव का भी समर्थन नहीं करते हैं। किसी भी सहयोग से इलाके के देशों के बीच आपसी भरोसे और सहयोग को कम नहीं करना चाहिए।"

क्वाड समूह ने जरूरी मिनरल और ऊर्जा में सहयोग बढ़ाया और इस इलाके में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत को देखते हुए हिंद-प्रशांत में समुद्री निगरानी और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए नए कदम उठाए हैं।

क्वाड विदेश मंत्रियों की मीटिंग की अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने की और अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी शामिल हुए।

इस दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, "यह हमारी 2026 की पहली बैठक है। हमने 2025 में दो बार मुलाकात की थी। जाहिर है, ज्यादातर चर्चा और द्विपक्षीय बातचीत दुनिया की मौजूदा स्थिति पर केंद्रित रही। क्वाड के सदस्य होने के नाते हमने हिंद-प्रशांत से जुड़े मुद्दों पर खास ध्यान दिया, क्योंकि हम समुद्री सीमा वाले चार लोकतांत्रिक देश हैं, जो हिंद-प्रशांत के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं। विचारों का आदान-प्रदान काफी उपयोगी रहा।"

उन्होंने कहा, "समुद्री क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है, जिसमें निगरानी और डोमेन अवेयरनेस, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, समुद्री केबल, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आपदा राहत गतिविधियां शामिल हैं। हम आने वाले समय में इन क्षेत्रों में सहयोग और बढ़ाते रहेंगे। हमने सुरक्षित और बिना रुकावट वाले समुद्री व्यापार के मुद्दे पर भी चर्चा की और अंतरराष्ट्रीय कानून का सख्ती से पालन करने के महत्व को दोहराया।"

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि हमारे चारों देश बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाएं हैं। हम मानते हैं कि आर्थिक मजबूती बढ़ाई जानी चाहिए, सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित बनाया जाना चाहिए, भरोसेमंद तकनीक को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जानी चाहिए। हमारी बातचीत में ऊर्जा, उर्वरक, क्रिटिकल मिनरल्स और संसाधनों की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई। हमारा लक्ष्य है कि हम आपसी सहयोग बढ़ाएं और साथ ही अन्य देशों की भी मदद करें।