'ब्लड डोनेट' वाहन बना सुरक्षा दीवार: अस्पताल की गंदगी छिपाने के लिए सरकारी संपत्ति का ऐसा दुरुपयोग

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छतरपुर,शिवम सोनी। जिला अस्पताल परिसर में सोमवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यहाँ जीवनदायिनी कही जाने वाली ब्लड डोनेशन बस को किसी अभियान के लिए नहीं, बल्कि खुले में पेशाब करने वालों को रोकने के लिए एक 'बैरिकेड' के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
दीवार से सटाकर खड़ा किया वाहन
अस्पताल परिसर में संचालित इस सरकारी बस को बेहद लापरवाही के साथ आड़े तरीके से खड़ा किया गया है। वाहन का पिछला हिस्सा सीधे दीवार से सटा हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस को इस तरह खड़ा करना न केवल वाहन के लिए नुकसानदेह है, बल्कि संकरे रास्ते पर इसके कारण किसी भी वक्त हादसा हो सकता है।
मजबूरी या प्रशासनिक लापरवाही?
जब इस अजीबोगरीब पार्किंग के बारे में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से पूछताछ की गई, तो चौंकाने वाला जवाब सामने आया। कर्मचारियों का कहना है कि:
"ब्लड डोनेशन कार्यालय के पीछे लोग खुले में पेशाब करते हैं, जिससे बहुत गंदगी और बदबू फैलती है। इसी को रोकने के लिए बस को प्रवेश मार्ग पर खड़ा कर दिया गया है।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
स्थानीय नागरिकों और जानकारों का कहना है कि गंदगी रोकना जरूरी है, लेकिन इसके लिए लाखों की सरकारी संपत्ति (बस) को जोखिम में डालना कहाँ की समझदारी है?
क्या अस्पताल प्रशासन के पास एक गेट या बैरिकेड लगवाने का बजट नहीं है?
यदि बस में कोई तकनीकी खराबी आती है या दीवार गिरती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उपयोग होने वाले वाहन का ऐसा अपमान क्या उचित है?
फिलहाल, जिम्मेदार अधिकारी इस मामले पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय बचते नजर आ रहे हैं, जिससे अस्पताल प्रबंधन की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
