चंडीगढ़। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत 619 महिला बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मियों (एमपीएचडब्ल्यू) की भर्ती के लिए व्यापक प्रशासनिक प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इस कदम का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और लोगों तक सेवा पहुंचाने की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना है।चीमा ने एक बयान में कहा कि ये पद विभाग के भीतर सीधी भर्ती और प्रमोशन कोटे का एक रणनीतिक मिश्रण हैं।
वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने बताया कि कुल 619 पदों में से 220 पद एक वर्ष से कम समय से रिक्त हैं, जबकि 346 पद पदोन्नति के लिए निर्धारित हैं, जिनके माध्यम से प्रशिक्षित दाइयों (ट्रेंड दाई) को बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मी (एमपीएचडब्ल्यू) के पद पर पदोन्नत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 53 प्रत्यक्ष भर्ती के पद, जो एक वर्ष से अधिक समय तक रिक्त रहने के कारण वित्त विभाग के 6 जून, 2019 के दिशा-निर्देशों के तहत समाप्त कर दिए गए थे, उन्हें मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद फिर से बहाल किया जाएगा।
चीमा ने बताया कि नियुक्त होने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को पंजाब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तकनीकी (ग्रुप-सी) सेवा (प्रथम संशोधन) नियम, 2025 के तहत लेवल-3 में 21,700 रुपए से 69,100 रुपए का वेतनमान मिलेगा।
भर्ती प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने इन 619 पदों की भर्ती को पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया है, क्योंकि बोर्ड के माध्यम से भर्ती में आमतौर पर अधिक समय लगता है।
इसके बजाय पूरी भर्ती प्रक्रिया फरीदकोट स्थित बाबा फरीद स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के माध्यम से सीधे कराई जाएगी। इस संबंध में 3 दिसंबर, 2025 को पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने भी औपचारिक सहमति दे दी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन पदों को भरने से अनिवार्य परिवीक्षा अवधि के दौरान राज्य सरकार पर प्रति वर्ष लगभग 16.12 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
औद्योगिक क्षेत्र में प्रशासनिक सुधारों का जिक्र करते हुए चीमा ने कहा कि उद्योग विभाग के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है, जिसके तहत विभाग की कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए प्रत्यक्ष भर्ती वाले महत्वपूर्ण पदों को फिर से बहाल किया जाएगा।

