मंदसौर, ललित शंकर धाकड़। जिले के बादाखेड़ी गांव में संचालित एक कथित मदरसे और शिक्षण संस्था को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। मध्य प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं, जिसके बाद संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।


जांच में सामने आया कि संबंधित संस्था के पास मदरसा बोर्ड की मान्यता नहीं है, इसके बावजूद वहां छठी से आठवीं कक्षा तक बच्चों को शिक्षा दिए जाने का दावा किया जा रहा था। आयोग की टीम को निरीक्षण के दौरान आवश्यक दस्तावेज और अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे संदेह और गहरा गया।


प्राथमिक जानकारी के अनुसार संस्था में 36 बच्चियों का पंजीयन दर्ज बताया गया, लेकिन परिसर में 100 से 150 बच्चियों के रहने की व्यवस्था मिलने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। जांच के दौरान बच्चियों से संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिला। संस्था के संचालक आयोग के अधिकारियों को स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी देने में असफल रहे।


निरीक्षण के दौरान परिसर के कुछ कमरों पर ताले लगे मिले। आयोग अध्यक्ष के निर्देश के बावजूद इन कमरों को नहीं खोला गया, जिससे मामले ने और अधिक रहस्यमय रूप ले लिया। बंद कमरों में क्या गतिविधियां संचालित हो रही थीं, इसे लेकर भी जांच एजेंसियां गंभीरता से पड़ताल कर रही हैं।


बाल अधिकार आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग का कहना है कि यदि बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बादाखेड़ी की यह शिक्षण संस्था जांच के घेरे में है और प्रशासन पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है।