नई दिल्ली। आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य को केवल तनाव या चिंता से जोड़कर नहीं देखा जाता, बल्कि इसे मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन से जोड़ा जाता है। आयुर्वेद मानता है कि जब हमारी जीवनशैली संतुलित होती है, तो उसका सकारात्मक असर हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई देता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का दबाव, लगातार स्क्रीन पर समय बिताना, नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या मानसिक थकान बढ़ा सकती है। ऐसे में स्वस्थ जीवनशैली के साथ कुछ पारंपरिक योग और आयुर्वेदिक अभ्यास मन को शांत रखने में मददगार हो सकते हैं।

आयुष मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर बताया कि आयुर्वेद में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए शिरोधारा, शिरो अभ्यंग, ध्यान, प्राणायाम और योगासन जैसी प्रक्रियाओं को महत्व दिया जाता है। शिरोधारा में माथे पर धीरे-धीरे औषधीय तेल की धार डाली जाती है। यह प्रक्रिया बेहद आरामदायक मानी जाती है और व्यक्ति को रिलैक्स महसूस कराने में मदद कर सकती है। इसी तरह शिरो अभ्यंग यानी औषधीय तेल से सिर की मालिश भी तनाव और थकान के बीच सुकून देने वाली प्रक्रिया हो सकती है।

ध्यान यानी ध्यान केंद्रित करने का अभ्यास मन को शांत करने और विचारों को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है। रोजाना कुछ समय शांत बैठकर ध्यान करने से व्यक्ति अपने मन पर बेहतर तरीके से ध्यान दे पाता है। वहीं, प्राणायाम में सांस लेने और छोड़ने की नियंत्रित तकनीकों का अभ्यास किया जाता है। नियमित रूप से किए जाने वाले प्राणायाम और योगासन शरीर को सक्रिय रखने के साथ मानसिक रूप से भी हल्का और संतुलित महसूस कराने में मदद कर सकते हैं।

हालांकि इन अभ्यासों को स्वस्थ खान-पान, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित दिनचर्या के साथ अपनाना ज्यादा उपयोगी माना जाता है। किसी भी आयुर्वेदिक उपचार या औषधीय प्रक्रिया को विशेषज्ञ की सलाह से ही अपनाना चाहिए।