गुवाहाटी, 4 मई । असम विधानसभा चुनाव के नतीजों में टिंगखोंग सीट से भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर दमदार प्रदर्शन किया है। भाजपा उम्मीदवार बिमल बोरा ने कांग्रेस के बिपुल गोगोई को 49026 वोटों के बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की। बोरा को कुल 88912 वोट मिले, जबकि गोगोई 39886 वोटों पर सिमट गए। इस जीत के साथ टिंगखोंग में भाजपा की पकड़ और मजबूत होती नजर आ रही है।

डिब्रूगढ़ जिले की यह ग्रामीण सीट ऊपरी असम के चाय बागानों और धान के खेतों के बीच स्थित है। कभी शांत कृषि क्षेत्र रही टिंगखोंग अब राज्य की एक अहम राजनीतिक सीट बन चुकी है, जहां मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी और बदलती राजनीतिक निष्ठाएं चुनावी समीकरण तय करती हैं। लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रही इस सीट पर पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने मजबूत पकड़ बनाई है और इसे अपने भरोसेमंद क्षेत्रों में शामिल कर लिया है।

1967 में अस्तित्व में आई इस विधानसभा सीट ने अब तक 12 चुनाव देखे हैं। कांग्रेस ने यहां पांच बार जीत हासिल की, जिनमें 1996 से 2006 के बीच लगातार तीन जीत शामिल हैं। वहीं, भाजपा ने 2016 और 2021 में लगातार दो बार जीत दर्ज की थी और अब तीसरी बार 2026 में भी विजयी रही। इसके अलावा, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी, असम गण परिषद और एक निर्दलीय उम्मीदवार भी यहां से जीत हासिल कर चुके हैं।

2011 में कांग्रेस के अतुवा मुंडा ने एजीपी के अनूप फुकन को हराकर जीत हासिल की थी। लेकिन 2016 में भाजपा ने समीकरण बदल दिए, जब बिमल बोरा ने कांग्रेस के अतुवा मुंडा को 18,338 वोटों से हराया। इसके बाद 2021 में भी बोरा ने अपनी बढ़त बरकरार रखते हुए कांग्रेस को 28,394 वोटों से पराजित किया था। मौजूदा चुनाव में उनकी जीत का अंतर और बढ़ गया है, जो क्षेत्र में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।

लोकसभा चुनावों में भी इस सीट पर भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ता गया है। 2009 में कांग्रेस ने मामूली अंतर से बढ़त बनाई थी, लेकिन 2014 और 2019 में भाजपा ने स्पष्ट बढ़त हासिल की। 2024 में भले ही अंतर कुछ कम हुआ, फिर भी पार्टी ने अपनी बढ़त बनाए रखी।

मतदाता संख्या के लिहाज से भी टिंगखोंग में लगातार वृद्धि देखी गई है। 2026 के अंतिम मतदाता सूची के अनुसार यहां 1,77,658 मतदाता हैं, जो 2024 की तुलना में 9,111 अधिक हैं। 2023 के परिसीमन के बाद भी इस सीट पर मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले 2021 में यहां 1,44,548, 2019 में 1,36,088, 2016 में 1,21,571 और 2011 में 1,15,860 मतदाता दर्ज किए गए थे।

सामाजिक संरचना की बात करें तो यहां किसी एक समुदाय का वर्चस्व नहीं है। अनुसूचित जनजाति के मतदाता लगभग 12.46 प्रतिशत हैं, जबकि अनुसूचित जाति के मतदाता करीब 1.51 प्रतिशत हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है। पूरी तरह ग्रामीण इस सीट पर शहरी मतदाता नहीं हैं। यहां मतदान प्रतिशत भी काफी ऊंचा रहा है- 2011 में 73.75%, 2016 में 85.23%, 2019 में 77.15% और 2021 में 82.46% मतदान दर्ज किया गया।

भौगोलिक रूप से टिंगखोंग ब्रह्मपुत्र घाटी के उपजाऊ मैदानी इलाके में स्थित है, जहां चाय और धान की खेती प्रमुख है। दिहिंग नदी और उसकी सहायक नदियां कृषि को सहारा देती हैं। इस क्षेत्र का इतिहास अहोम साम्राज्य से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि राजा सुहंगमुंग ने इस क्षेत्र को बसाया था, जबकि बाद में तुंगखुंगिया वंश के शासकों का भी यहां प्रभाव रहा।

स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से चाय बागानों, कृषि और छोटे व्यवसायों पर निर्भर है। सड़क संपर्क के लिए नेशनल हाईवे-15 और राज्य मार्ग उपलब्ध हैं। नजदीकी रेलवे स्टेशन नाहरकटिया (करीब 20 किमी) है, जबकि डिब्रूगढ़ का मोहनबाड़ी हवाई अड्डा लगभग 80 किमी दूर स्थित है।