सतना, अंबिका केशरी। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सतना जिले में सड़क निर्माण कार्य कर रहे संविदाकारों ने विभागीय अव्यवस्थाओं, कथित भ्रष्टाचार और अधिकारियों की कार्यशैली के विरोध में मोर्चा खोल दिया। संविदाकारों ने सिविल लाइन स्थित ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर नारेबाजी की तथा भोपाल स्थित मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आठ सूत्रीय मांगों वाला शिकायती पत्र भेजकर समस्याओं के तत्काल निराकरण की मांग की।

संविदाकारों का आरोप है कि अन्य विभागों के साथ समन्वय के अभाव और कुछ अधिकारियों की कथित तानाशाही के कारण उन्हें मानसिक दबाव में कार्य करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जल संवर्धन योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कों के शोल्डर खोदे जा रहे हैं, जिससे नई बनी सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इसके बावजूद सड़क खराब होने का जिम्मेदार ठहराकर संविदाकारों को कम अंक दिए जाते हैं और उनका भुगतान रोक दिया जाता है या बेहद कम कर दिया जाता है।

शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिले में नहर निर्माण कार्य के लिए भारी वाहनों और मशीनों के संचालन से सड़कों की डामर परत उखड़ रही है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी भी संविदाकारों पर डाली जा रही है। उन्होंने अधिकारियों पर अनुचित दबाव और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए विभाग में व्याप्त कथित कमीशनखोरी पर रोक लगाने की मांग की है।

संविदाकारों ने ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया की कुछ शर्तों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था से केवल बड़े ठेकेदारों को लाभ मिल रहा है, जबकि स्थानीय छोटे संविदाकारों के लिए प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो गया है। उन्होंने टेंडर की विवादित शर्तों में संशोधन कर सभी संविदाकारों को समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है। संविदाकारों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।