नौगांव, कमल यादव। मध्य प्रदेश शासन की खरीफ सीजन के लिए किसानों को निःशुल्क बीज उपलब्ध कराने की योजना नौगांव विकासखंड में विवादों के घेरे में आ गई है। कृषि विभाग पर बीज वितरण में अनियमितता, किसानों की अनदेखी और बीज की कथित कालाबाजारी के आरोप लगने के बाद किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिली। आक्रोशित किसानों ने देर रात तक प्रदर्शन करते हुए मामले की शिकायत पुलिस से की और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।


जानकारी के अनुसार नौगांव विकासखंड के लिए करीब 1200 क्विंटल मूंगफली बीज के अलावा मूंग, उड़द और अरहर के बीज उपलब्ध कराए गए थे। बीज वितरण के लिए मानपुरा और गरोली रोड स्थित दो केंद्र बनाए गए थे। किसानों का आरोप है कि पंजीयन कराने के बावजूद उन्हें कई दिनों से बीज नहीं दिया गया, जबकि रात के समय पिकअप वाहनों के माध्यम से बीज बाहर भेजकर 2000 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल तक में बेचे जाने की चर्चाएं क्षेत्र में हैं।


किसानों का कहना है कि वे पिछले एक सप्ताह से कृषि विभाग कार्यालय और वितरण केंद्रों के लगातार चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है। बुधवार को भी बड़ी संख्या में किसान पूरे दिन बीज मिलने का इंतजार करते रहे। देर रात तक वितरण नहीं होने पर नाराज किसान करीब 11 बजे नौगांव थाने पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की।


किसानों ने बताया कि बीज मिलने की उम्मीद में कई लोग पूरी रात वेयरहाउस के बाहर खुले में पड़े रहे। इस दौरान अंधेरे में सांप निकलने जैसी घटनाएं भी सामने आईं, लेकिन किसानों का आरोप है कि अधिकारियों ने उनकी कोई सुध नहीं ली।


मामले की जानकारी मिलने पर महाराजपुर की पूर्व विधायक नीरज दीक्षित कृषि विभाग कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने किसानों से चर्चा कर अधिकारियों से जवाब मांगा तथा आरोप लगाया कि किसानों के लिए सरकार द्वारा भेजा गया निःशुल्क बीज दलालों के माध्यम से बाजार में बेचा जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।


इधर किसानों ने मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से हस्तक्षेप करते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा यदि अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और दोषी लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। वहीं, इस मामले में कृषि विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना शेष है।