बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के किरनापुर थाने में चोरी के एक मामले की जांच के दौरान पति-पत्नी के साथ अमानवीय व्यवहार और कथित मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पूछताछ के नाम पर दंपती के कपड़े उतरवाकर उनके साथ मारपीट की गई। पीड़िता के करीब दो माह की गर्भवती होने का भी दावा किया जा रहा है। मामला तूल पकड़ते ही एसपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उपनिरीक्षक समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।


स्ट्रेचर पर पीड़िता को लेकर SP दफ्तर पहुंचे परिजन

घटना के विरोध में सोमवार को पीड़िता के परिजन उसे स्ट्रेचर पर लादकर सीधे पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचे और आला अधिकारियों के सामने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद एसपी आदित्य मिश्रा ने तुरंत एक्शन लेते हुए निम्नलिखित पुलिसकर्मियों को निलंबित कर लाइन अटैच (रक्षित केंद्र) कर दिया:


उपनिरीक्षक (SI): दामेन्द्र तुरकर

प्रधान आरक्षक: आशीष बघेल

आरक्षक: कपिल बघेल

महिला आरक्षक: मेघा टेकाम


मामले की निष्पक्ष जांच के लिए DSP प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में चार सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है, जिसे दो सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।


50 हजार रुपये की चोरी के संदेही के रूप में थाने लाए गए थे पति-पत्नी

मामला 21 अगस्त को किरनापुर पोस्ट ऑफिस में हुई एक चोरी से जुड़ा है। नागुटोला निवासी शीला कारमेगे ने बैंक से 1 लाख रुपये निकाले थे, जिसमें से एक अज्ञात व्यक्ति की चालाकी के बाद उनके बैग से 50 हजार रुपये गायब हो गए थे। इसी मामले की तफ्तीश के सिलसिले में पुलिस 2 सितंबर को कैलाश चौधरी और उनकी पत्नी सावित्री को पूछताछ के लिए थाने लाई थी।परिजनों का आरोप है कि चोरी का जुर्म कबूल कराने के लिए पुलिस ने दोनों के साथ अमानवीय व्यवहार किया। सावित्री को अगले दिन शाम तक अवैध हिरासत में रखा गया और उनके शरीर पर चोट के गंभीर निशान मौजूद हैं।


परिजनों ने कहा- बेकसूर हैं दोनों, राष्ट्रपति व महिला आयोग से की शिकायत

कैलाश के परिजनों का दावा है कि घटना के वक्त कैलाश मवेशी चरा रहा था और सावित्री घर पर सिलाई का काम कर रही थी। बिना किसी ठोस साक्ष्य के संदेह के आधार पर दोनों को उठाकर प्रताड़ित किया गया। परिजनों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय एवं राज्य महिला आयोग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शिकायत पत्र भेजा है। फिलहाल, एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई तय होगी।