भोपाल। मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल और प्रदर्शन दूसरे दिन भी तेजी से उग्र हो गया है। मौजूदा स्टाइपेंड 14,337 रुपये को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मुख्य मांग को लेकर पूरे प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों ने मोर्चा खोल दिया है। भोपाल के जीएमसी (गांधी मेडिकल कॉलेज) से शुरू हुआ यह विरोध अब इंदौर, खंडवा समेत पूरे राज्य में फैल चुका है, जिससे सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।


भोपाल के कमला पार्क में रातभर डटे रहे डॉक्टर, शहर में यातायात ठप

भोपाल में सैकड़ों इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क की सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करते रहे। पुलिस द्वारा सीएम हाउस की ओर जाने वाले सभी रास्ते बैरिकेड्स लगाकर बंद किए जाने से आम जनता को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रोशनपुरा से रॉयल मार्केट तक भीषण जाम की स्थिति बनी हुई है। राजा भोज ब्रिज और जहांगीराबाद वाले वैकल्पिक मार्गों से रूट डायवर्ट कर ट्रैफिक निकालने की कोशिश की जा रही है। हमीदिया अस्पताल में ओपीडी सेवाएं ठप होने से दूर-दराज से आए मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा या घंटों इंतजार करना पड़ा। हालांकि, अस्पतालों में आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाएं जारी रखी गई हैं।


लाठीचार्ज और वॉटर कैनन पर गरमाई राजनीति, सीएम ने दिए जांच के आदेश

सोमवार को प्रदर्शनकारी डॉक्टरों पर पुलिस द्वारा चलाए गए वॉटर कैनन, कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का मामला अब तूल पकड़ चुका है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सिंह सिद्धू और इंटर्न डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर अमानवीय कार्रवाई की गई, जिससे कई साथियों के ईयरड्रम डैमेज हुए और फ्रैक्चर आए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर भोपाल पुलिस आयुक्त ने वॉटर कैनन और बल प्रयोग की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं।


इंदौर और खंडवा में भी विरोध प्रदर्शन, ओपीडी से वॉकआउट

भोपाल में डॉक्टरों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में इंदौर के एमवाय (MY) अस्पताल में इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों ने रैली निकालकर जमकर नारेबाजी की। सुबह 11 बजे के बाद डॉक्टरों ने ओपीडी का बहिष्कार कर दिया, जिसके बाद वरिष्ठ डॉक्टरों को मोर्चा संभालना पड़ा। उधर खंडवा में भी डॉक्टरों ने दो घंटे तक मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर सरकार के खिलाफ अपना विरोध जताया।


सरकार से बातचीत जारी, लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन पर अड़े डॉक्टर

उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने वरिष्ठ चिकित्सकों और अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने दावा किया कि स्टाइपेंड बढ़ाने और पुलिस कार्रवाई की जांच दोनों मुद्दों पर इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से सकारात्मक बातचीत हुई है और मुख्यमंत्री के भोपाल लौटते ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


हालांकि, इंटर्न डॉक्टरों का रुख स्पष्ट है। उनका कहना है कि जब तक स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक लिखित आदेश जारी नहीं होता और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका यह आंदोलन पूरे प्रदेश में जारी रहेगा।