रतलाम। इंदौर के चर्चित भागीरथपुरा कांड की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से भी दूषित पानी पीने के कारण बड़े पैमाने पर लोगों के बीमार पड़ने का गंभीर मामला सामने आया है। जिले की पिपलोदा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम आजमपुर डोडिया में पिछले तीन-चार दिनों के भीतर कुएं का दूषित पानी पीने से अचानक 80 से अधिक ग्रामीण उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के चलते गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। इस सामूहिक बीमारी की खबर फैलते ही प्रशासनिक और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में एम्बुलेंस भेजकर गंभीर रूप से पीड़ित 21 मरीजों को पिपलोदा के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई है।
800 की आबादी वाले गांव में हाहाकार, स्वास्थ्य विभाग ने लगाया मेडिकल कैंप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 800 की आबादी वाले आजमपुर डोडिया गांव में पिछले कुछ दिनों से अचानक उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी। शुक्रवार को जब मामले की आधिकारिक सूचना प्रशासन तक पहुंची, तो खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ। पवन पाटीदार ने तुरंत एक्शन लिया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ। किरण वाडिया के निर्देश पर महामारी विशेषज्ञ गौरव बोरिवाल की अगुवाई में डॉक्टरों की एक विशेष टीम गांव पहुंची। टीम ने प्रभावित गांव में ही अस्थाई मेडिकल कैंप लगाकर करीब 80 ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच की और उन्हें जरूरी दवाइयां वितरित कीं। इसके साथ ही, अन्य संभावित मरीजों की पहचान के लिए स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर सघन सर्वे अभियान चलाया गया।
ग्रामीणों ने मल के नमूने देने से किया इनकार, खून के सैंपल जांच के लिए भेजे
महामारी की असली वजह का पता लगाने के लिए जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों से जांच हेतु मल (स्टूल) के नमूने मांगे, तो ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से सैंपल देने से इनकार कर दिया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए बीमार मरीजों के खून (ब्लड) के नमूने लिए। इन सभी नमूनों को लैबोरेट्री में उच्च स्तरीय जांच के लिए भेज दिया गया है, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के मुख्य वायरस या बैक्टीरिया की असली वजह साफ हो पाएगी।
पाइपलाइन का पानी लगता था फीका, मीठे के चक्कर में पिया कुएं का 'जहर'
इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच समर्थ मल खरोल ने एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला खुलासा किया है। सरपंच के मुताबिक, गांव में नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन से जो पानी आता था, वह ग्रामीणों को स्वाद में थोड़ा फीका लगता था। इसी वजह से ग्रामीण पाइपलाइन का पानी छोड़कर कुएं का स्वाद में मीठा लगने वाला पानी पीना ज्यादा पसंद करते थे। सरपंच ने बताया कि हाल ही में मोटर पंप के जरिए पूरा पानी बाहर निकालकर इस कुएं की अच्छे से सफाई भी कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद भूजल में संक्रमण के चलते पानी दूषित निकला और वही इस महामारी की मुख्य जड़ बन गया।
दूषित कुआं पूरी तरह सील, अब टैंकरों से हो रही सुरक्षित पेयजल की सप्लाई
प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में कुएं के पानी को ही संक्रमण फैलने का मुख्य कारण माना है। सुरक्षा के लिहाज से अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से उस दूषित कुएं को पूरी तरह से सील करवा दिया है ताकि कोई भी ग्रामीण दोबारा उसका पानी न भर सके। सरपंच समर्थ मल खरोल ने पुष्टि की है कि कुएं को बंद करने के बाद अब पूरे गांव में प्रशासन और पंचायत के सहयोग से साफ टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी है और प्रशासन आगे के लिए पूरी सावधानी बरत रहा है।




