छतरपुर। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के छतरपुर कार्यालय में भ्रष्टाचार की जड़ें किस कदर गहरी हो चुकी हैं, इसका जीता-जागता प्रमाण 300 विद्युत खंभों के रहस्यमयी तरीके से गायब होने के मामले ने उजागर कर दिया है। सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए विभाग के भीतर सुनियोजित तरीके से चल रहे इस कथित 'पोल घोटाले' ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप सीधे कार्यपालन यंत्री अमर श्रीवास्तव और उनके करीबी मेंटेनेंस अमले पर लगे हैं, जबकि आला अधिकारी हमेशा की तरह जांच का घिसा-पिटा राग अलापकर मामले को ठंडे बस्ते में डालने की जुगत में दिख रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विद्युत अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के नाम पर जारी किए गए 300 नए खंभों का अब तक कोई अता-पता नहीं है। सूत्रों और विपक्षी आरोपों के अनुसार, विभाग में एक बेहद शातिर सिंडिकेट सक्रिय है, जिसके द्वारा सोची-समझी योजना के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से पहले पुराने, जर्जर खंभों को उखाड़ा जाता है और फिर इन्हीं पुराने खंभों पर मामूली मरम्मत और रंग-रोगन कर उन्हें दोबारा नया बताकर खड़ा कर दिया जाता है। और इसी हेरफेर के जरिए करीब 300 नए खंभों की पूरी सरकारी राशि का फर्जी वाउचर और बिलिंग के जरिए बंदरबांट कर लिया गया है। स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि 300 भारी-भरकम सीमेंट और लोहे के खंभे कोई सुई नहीं हैं, जो रात-रात में गायब हो जाएं। बिना विभागीय अफसरों की साठगांठ और संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर सामग्री का हेरफेर नामुमकिन है।
इस पूरे मामले को लेकर छतरपुर का राजनैतिक पारा भी गरमा गया है। विपक्ष यानि की कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अनीस खान ने बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीधे तौर पर कार्यपालन यंत्री अमर श्रीवास्तव और मेंटेनेंस में पदस्थ राजेश खरे को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने ने कड़े शब्दों में कहा कि छतरपुर विद्युत विभाग आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। कार्यपालन यंत्री अमर श्रीवास्तव और मेंटेनेंस प्रभारी राजेश खरे की मिलीभगत से पुराने खंभों को नया दर्शाकर लाखों रुपये की सरकारी राशि डकार ली गई है। भाजपा शासन में अधिकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि ऊपर से लेकर नीचे तक का तंत्र इस लूट में शामिल है। पहले पुराने खंभे उखाड़े जाते हैं, फिर कागजों में उन्हें नया दिखाकर नया बजट हड़प लिया जाता है। अगर इस संगठित लूट पर तत्काल रोक नहीं लगी और दोषियों पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।
मजेदार पहलू यह है कि इतने संगीन आरोपों और सैकड़ों खंभों के गायब होने के बावजूद विभाग का शीर्ष नेतृत्व सख्त रुख अपनाने की बजाय रक्षात्मक मुद्रा में है। अधीक्षण अभियंता एसबी सिंह केवल नियमानुसार जांच का औपचारिक बयान देकर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। एस.बी. सिंह का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी और वे फिलहाल इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। हालांकि, जनता और जागरूक नागरिकों का सवाल है कि जब मुख्य आरोपी कुर्सी पर जमे हुए हैं, तो क्या निष्पक्ष जांच संभव है? क्या जांच के नाम पर केवल समय काटा जा रहा है ताकि सबूतों को नष्ट किया जा सके?
छतरपुर की विद्युत व्यवस्था पर भी गौर किया जाए तो जनता बार-बार अघोषित बिजली कटौती, झूलते तारों और खराब ट्रांसफार्मरों से त्रस्त है। ऐसे में विकास और मरम्मत के बजट को अधिकारियों द्वारा निजी तिजोरियों में भरे जाने की खबरों ने आम जनमानस में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
बहरहाल अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जिला प्रशासन और ऊर्जा मंत्रालय इस मामले में हस्तक्षेप कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराएंगे और जिम्मेदार कार्यपालन यंत्री समेत पूरे सिंडिकेट पर गबन का मुकदमा दर्ज होगा, या फिर यह घोटाला भी फाइलों की धूल फांकता रह जाएगा।














