विदिशा। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के दौरान विदिशा जिले के एक परीक्षा केंद्र पर तीन छात्राएं परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं। इनमें से दो छात्राएं निर्धारित समय से महज दो मिनट की देरी से पहुंचीं, जबकि एक अन्य छात्रा गलत प्रवेश पत्र लेकर परीक्षा केंद्र पहुंच गई थी। इस घटना से छात्राओं और उनके परिजनों में गहरी निराशा देखी गई।
जानकारी के अनुसार, जिले में बनाए गए चार परीक्षा केंद्रों में से गर्ल्स कॉलेज केंद्र पर यह स्थिति सामने आई। परीक्षा केंद्र में अभ्यर्थियों को सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक प्रवेश की अनुमति थी। विदिशा की स्नेहा दुबे और कुरवाई तहसील के ग्राम कूला निवासी रागनी विश्वकर्मा निर्धारित समय समाप्त होने के करीब दो मिनट बाद केंद्र पहुंचीं। प्रारंभ में उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।
मामले की जानकारी मिलने पर परीक्षा की नोडल अधिकारी एवं केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य गीता भदोरिया मौके पर पहुंचीं। उन्होंने छात्राओं और उनके परिजनों से चर्चा की। छात्राओं ने बताया कि वे समय पर घर से निकली थीं, लेकिन रास्ते में वाहन पंचर होने और बारिश के कारण देर हो गई।
बाद में दोनों छात्राओं को परीक्षा केंद्र के भीतर ले जाया गया, लेकिन प्रवेश प्रक्रिया के दौरान उनका बायोमेट्रिक सत्यापन सफल नहीं हो पाया। तकनीकी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिल सकी और वापस लौटना पड़ा।
इसी केंद्र पर विदिशा की छात्रा अक्षत श्रीवास्तव भी परीक्षा से वंचित रह गईं। बताया गया कि वह पूर्व में आयोजित परीक्षा का प्रवेश पत्र लेकर पहुंची थीं। जांच के दौरान प्रवेश पत्र अमान्य पाए जाने पर उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई।
केंद्र के बाहर परिजन भावुक नजर आए। रागनी विश्वकर्मा के पिता उमेश सिंह विश्वकर्मा ने बताया कि वे अपनी बेटी को परीक्षा दिलाने के लिए कुरवाई तहसील के कूला गांव से लगभग 70 किलोमीटर दूर से आए थे। उन्होंने कहा कि बारिश के कारण रास्ते में रुकना पड़ा, जिससे वे मात्र दो मिनट देर से पहुंचे। काफी अनुरोध के बावजूद निर्धारित समय निकल जाने के कारण प्रवेश नहीं मिल सका। बाद में प्रशासनिक स्तर पर प्रयास हुए, लेकिन तकनीकी प्रक्रिया पूरी नहीं होने से छात्राएं परीक्षा नहीं दे सकीं।

