इंदौर/भोपाल। इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के अपमान और उसके बाद उपजे बयानों के बवंडर को कांग्रेस के दिल्ली आलाकमान ने बेहद गंभीरता से लिया है। सूत्रों के मुताबिक, संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने इस पूरे मामले में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से विस्तृत जानकारी मांगी है। इस विवाद ने अब इतना तूल पकड़ लिया है कि इंदौर के कद्दावर नेता चिंटू चौकसे, पार्षद फौजिया अलीम, रूबीना खान और वरिष्ठ नेता केके मिश्रा को अनुशासन समिति के सामने पेश होकर स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है।
'बारात कहीं और जा रही थी, उतर गई मेरे घर'— रूबीना ने जताया खेद
विवाद के केंद्र में रहीं पार्षद रूबीना खान ने अब अपने बयानों पर खेद व्यक्त किया है। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि बीजेपी पार्षदों ने उन्हें उकसाने के लिए नारेबाजी की थी और वे जानते थे कि उन्हें जल्दी गुस्सा आ जाता है। रूबीना ने भावुक होते हुए कहा, "गुस्से में दो अल्फाज मेरे मुंह से निकले जो नहीं निकलने चाहिए थे, जिसका खेद मुझे शायद जिंदगीभर रहेगा।" उन्होंने एक मुहावरे का जिक्र करते हुए कहा कि "बारात कहीं और जा रही थी, उतर गई मेरे घर।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वे 50 से ज्यादा बैठकों में शामिल हुई हैं और हमेशा राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़ी रही हैं।
इन नेताओं पर गिर सकती है गाज
दिल्ली आलाकमान की नाराजगी केवल पार्षदों तक सीमित नहीं है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अनुशासन की रडार पर कई बड़े नाम हैं:
चिंटू चौकसे: रूबीना को बर्खास्त करने की मांग और सख्त बयानबाजी के लिए।
केके मिश्रा: राष्ट्रगीत न गाने वालों को 'पाकिस्तान जाने' की सलाह देने वाले बयान पर।
फौजिया अलीम: राष्ट्रगीत और धार्मिक नारों पर दी गई विवादित टिप्पणी के लिए।
राजू भदौरिया: इनसे भी मामले में भूमिका को लेकर सवाल किया जा सकता है।
इन सभी नेताओं को जल्द ही भोपाल में अनुशासन समिति के सामने पेश होने का फरमान जारी किया जा सकता है, और जरूरत पड़ने पर उन्हें दिल्ली भी तलब किया जा सकता है।
विधायक मालिनी गौड़ की तीखी प्रतिक्रिया— 'ऐसे लोगों का वोट नहीं चाहिए'
इधर, बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि जो वंदे मातरम नहीं बोलता, उन्हें उनके वोट की जरूरत नहीं है। एक सार्वजनिक आयोजन में उन्होंने कहा, "जो इस देश में रहेगा उसे वंदे मातरम और भारत माता की जय बोलना ही पड़ेगा। हम उन क्षेत्रों में वोट मांगने भी नहीं जाते जो राष्ट्रगीत का सम्मान नहीं करते।" मालिनी गौड़ के इस बयान ने इंदौर की राजनीति में राष्ट्रवाद की बहस को और तेज कर दिया है।
फिलहाल, कांग्रेस के भीतर इस मामले को लेकर भारी बेचैनी है। एक तरफ भाजपा इसे मुद्दा बनाकर आक्रामक है, तो दूसरी तरफ दिल्ली दरबार की नाराजगी ने इंदौर के स्थानीय नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देखना होगा कि अनुशासन समिति की जांच के बाद पार्टी अपने इन दिग्गज चेहरों पर क्या कार्रवाई करती है।



