उमरिया,तपस गुप्ता। उमरिया जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां जिंदा लोगों को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। आरोप है कि पंचायत सचिव ने मनमानी करते हुए न सिर्फ कई गरीब परिवारों को बीपीएल सूची से बाहर कर दिया, बल्कि दो लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत भी बता दिया।
मामला जनपद पंचायत करकेली के ग्राम पंचायत बड़ागांव का है। यहां पदस्थ पंचायत सचिव रामू सोनी पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव ने करीब 10 परिवारों को यह कहकर अपात्र घोषित कर दिया कि उनके परिवार में शासकीय सेवक हैं, जबकि हकीकत में ये लोग मजदूरी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। हैरानी की बात तब सामने आई जब गांव के दो लोग अशोक द्विवेदी और जुगराज सिंह गोंड़ खुद जिला पंचायत सीईओ के सामने पहुंचकर बोले कि साहब, हम जिंदा हैं, लेकिन कागजों में हमें मृत कर दिया गया है। इसके चलते उन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पंचायत सचिव खुद को आरएसएस का पदाधिकारी बताकर लोगों पर दबाव बनाता है और कहता है कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। गौरतलब है कि यही सचिव 24 दिसंबर 2024 को लोकायुक्त रीवा की टीम द्वारा रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया जा चुका है। इसके बावजूद उसे दूसरे ग्राम पंचायत में वित्तीय प्रभार दे दिया गया, जिस पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
वहीं, इस पूरे मामले पर जिला पंचायत सीईओ अभय सिंह ओहरिया का कहना है कि शिकायत मिली है, जांच टीम गठित की जाएगी और यदि सचिव दोषी पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल ये उठता है कि आखिर कैसे एक ट्रैप हो चुका कर्मचारी दोबारा जिम्मेदारी पा जाता है और किसके संरक्षण में ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं? फिलहाल जांच की बात कही जा रही है, लेकिन पीड़ितों को न्याय कब मिलेगा, ये बड़ा सवाल बना हुआ है।



