सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा में खुलासा, सिर्फ 13.41% मामलों में ही लोग निपटारे से संतुष्ट

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भोपाल/इंदौर/ग्वालियर । प्रदेश में सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के निराकरण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। मुख्य सचिव की 21 जनवरी को कलेक्टर–एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान की गई सख्त टिप्पणी के बाद हुई समीक्षा में सामने आया कि बड़ी संख्या में शिकायतों की न तो समय पर सुनवाई हो रही है और न ही शिकायतकर्ता निपटारे से संतुष्ट हैं।
1 से 23 जनवरी के बीच प्रदेशभर में सीएम हेल्पलाइन पर कुल 2 लाख 59 हजार 479 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन इनमें से केवल 13.41 प्रतिशत मामलों में ही शिकायतकर्ताओं ने संतुष्टि जताई। यानी हर 100 शिकायतों में करीब 87 शिकायतकर्ता निपटारे से असंतुष्ट रहे।
समीक्षा में यह भी सामने आया कि 12.54 प्रतिशत शिकायतें 50 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। यानी हर आठवीं शिकायत काफी समय से अटकी हुई है। इसके अलावा 9.83 प्रतिशत शिकायतें निम्न गुणवत्ता के साथ बंद की गईं, जिससे निपटारे की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।नॉन अटेंडेंट कैटेगरी में 25 हजार 811 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें शिकायतकर्ता से संपर्क नहीं किया गया या फील्ड स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सभी जिले डी-रेटिंग में
शिकायत निपटारे की रेटिंग में प्रदेश के सभी जिले डी श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। महानगरों को छोड़कर सबसे ज्यादा शिकायतें मुरैना में 8112, सागर में 8022, शिवपुरी में 7662, छतरपुर में 6837, राजगढ़ में 6777 और भिंड में 6473 दर्ज की गई हैं।इसके अलावा विदिशा में 5941, उज्जैन में 5840, गुना में 5464, रायसेन में 5409 और टीकमगढ़ में 5257 शिकायतें दर्ज हुईं।
1.74 लाख शिकायतें 100 दिन से ज्यादा पुरानी
आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 1 लाख 74 हजार से अधिक शिकायतें ऐसी हैं, जो 100 दिनों से ज्यादा समय से लंबित पड़ी हैं।कम शिकायतों वाले जिलों में अलीराजपुर में 338, बुरहानपुर में 1223, हरदा में 1749, आगर मालवा में 1998, नीमच में 2386, श्योपुर में 2457 और शाजापुर में 2950 शिकायतें दर्ज हुई हैं। वहीं खंडवा में 3200, दतिया में 3611, धार में 3737, नर्मदापुरम में 4063, देवास में 4163 और सीहोर में 4501 शिकायतें दर्ज की गई हैं।
ऊर्जा विभाग सबसे बेहतर
दिसंबर माह के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा शिकायतें राजस्व विभाग में दर्ज हुईं, जहां 61,685 शिकायतों में से सिर्फ 37 प्रतिशत मामलों में ही संतुष्टि मिली। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में 57,734 शिकायतें आईं, जिनमें 39 प्रतिशत संतुष्टि दर्ज हुई।
वहीं ऊर्जा विभाग में 42,462 शिकायतों में 60 प्रतिशत संतुष्टि के साथ निपटारा किया गया, जो प्रमुख विभागों में सबसे बेहतर स्थिति है।
