विजय कुमार डहरिया की कहानी संघर्ष, मेहनत और हौसले की ऐसी मिसाल है, जो लाखों युवाओं को प्रेरित कर रही है। सिवनी जिले के एक छोटे से गांव में जन्मे विजय आज सागर जिले में SDM के पद पर कार्यरत हैं।


कठिन हालात में बीता बचपन

विजय का बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। घर में न बिजली थी और न ही बुनियादी सुविधाएं। स्कूल जाने के लिए उन्हें रोजाना 7-8 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। इसके बावजूद वे पढ़ाई में हमेशा आगे रहे।


पढ़ाई के साथ किया काम

आर्थिक तंगी के चलते विजय ने पढ़ाई के साथ-साथ ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और पेट्रोल पंप पर भी काम किया। कभी भैंस चराने वाले विजय ने हालातों से हार मानने की बजाय उन्हें अपनी ताकत बना लिया।


5 बार असफलता, फिर भी नहीं मानी हार

विजय ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की, लेकिन उन्हें लगातार 5 बार असफलता का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य पर डटे रहे।


छठे प्रयास में मिली सफलता

आखिरकार छठे प्रयास में विजय कुमार डहरिया का चयन डिप्टी कलेक्टर के रूप में हुआ। उनकी इस सफलता ने न सिर्फ उनकी जिंदगी बदली, बल्कि वे आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।


यह कहानी बताती है कि संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि मजबूत इरादे सफलता की असली कुंजी होते हैं।