पन्ना/इंदौर। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग सेवानिवृत्त डीएसपी (DSP) और उनकी पत्नी के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित अभद्रता और एफआईआर के मामले ने अब प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया है। पन्ना एसपी निवेदिता नायडू के कड़े रुख और बुजुर्ग दंपत्ति पर आर्म्स एक्ट के तहत की गई कार्रवाई के विरोध में प्रदेशभर के रिटायर्ड आईपीएस और पुलिस अधिकारी सड़कों पर उतर आए हैं। इंदौर से लेकर भोपाल और छतरपुर तक 'वर्दी बनाम वर्दी' की यह लड़ाई अब सीधे टकराव की स्थिति में पहुँच गई है।
सीट बेल्ट विवाद से शुरू हुई कहानी, आर्म्स एक्ट तक पहुँची
पूरा विवाद एक साधारण सीट बेल्ट चेकिंग से शुरू हुआ था। आरोप है कि पन्ना की मड़ला पुलिस ने 80 वर्षीय सेवानिवृत्त डीएसपी भरत सिंह चौहान और उनकी बुजुर्ग पत्नी के साथ वाहन चेकिंग के दौरान दुर्व्यवहार किया। विवाद बढ़ने पर पुलिस ने न केवल बुजुर्ग दंपत्ति के साथ अभद्रता की, बल्कि उन पर आर्म्स एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पूर्व पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एक सम्मानित सेवानिवृत्त अधिकारी के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना पुलिस की कार्यप्रणाली पर कलंक है।
इंदौर में पूर्व पुलिस अधिकारियों ने खोला मोर्चा
इस घटना के विरोध में इंदौर में रिटायर्ड पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने लामबंद होकर मोर्चा खोल दिया है। पूर्व अधिकारियों ने एक स्वर में पन्ना एसपी निवेदिता नायडू को "बदमिजाज" बताते हुए उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने शासन को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि बुजुर्ग दंपत्ति पर दर्ज झूठी एफआईआर वापस नहीं ली गई और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र होगा।
प्रदेश भर में उबाल: 'अपनों' के खिलाफ ही खड़े हुए पूर्व जांबाज
यह मामला केवल इंदौर तक सीमित नहीं है; भोपाल और छतरपुर में भी पूर्व पुलिस अधिकारियों के संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक, पुलिस विभाग के भीतर ही दो फाड़ नजर आ रहे हैं। एक तरफ मौजूदा पुलिस प्रशासन नियमों का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ विभाग को दशकों तक अपनी सेवाएं देने वाले पूर्व अधिकारी इसे "वर्दी का अहंकार" बता रहे हैं। 80 साल के बुजुर्ग दंपत्ति पर पुलिसिया कार्रवाई ने मानवाधिकार संगठनों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है।
प्रशासनिक खेमे में हलचल
सेवानिवृत्त अधिकारियों के इस तरह सड़कों पर उतरने और सीधे एसपी को हटाने की मांग ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पुलिस मुख्यालय (PHQ) इस मामले की आंतरिक जांच की बात कह रहा है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जब तक एसपी को पन्ना से नहीं हटाया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। आने वाले दिनों में यह 'वर्दी बनाम वर्दी' का विवाद राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

