सतना, अंबिका केशरी। जिले के मझगवां थाना क्षेत्र से प्रशासनिक उदासीनता और दबंगई का एक गंभीर मामला सामने आया है। अपने पुश्तैनी मकान से बेदखल किया गया एक गरीब रजक परिवार न्याय की आस में कलेक्टर बंगले के बाहर खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि न्यायालय से राहत मिलने के बावजूद दबंग परिजनों ने लाठी-डंडों के बल पर उनके मकान का ताला तोड़ दिया, महिलाओं के साथ अभद्रता की और घर का पूरा सामान बाहर फेंककर अवैध कब्जा कर लिया।
मझगवां थाना क्षेत्र के आराजी नंबर-52 निवासी मखलू रजक के अनुसार उन्होंने अपने पुश्तैनी हिस्से की जमीन पर बाउंड्रीवॉल का निर्माण शुरू कराया था। इस पर विपक्षी निहोरा रजक ने एसडीएम न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी। आरोप है कि इसके बाद विपक्षी पक्ष ने कानून हाथ में लेते हुए निर्माणाधीन बाउंड्रीवॉल तोड़ दी, मकान का ताला तोड़कर जबरन कब्जा कर लिया और विरोध करने पर परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की।
पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना की शिकायत मझगवां थाने में दर्ज कराई गई, लेकिन पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय दोनों पक्षों पर क्रॉस केस दर्ज कर मामले की औपचारिकता पूरी कर दी। इससे दबंगों के हौसले और बढ़ गए तथा परिवार आज भी अपने ही घर से बेदखल है।
न्याय की तलाश में पीड़ित परिवार कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के पास भी पहुंचा, लेकिन अब तक उन्हें न तो मकान वापस मिला और न ही आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई। मजबूर होकर परिवार कलेक्टर बंगले के बाहर धरने जैसी स्थिति में बैठा है। हाथों में शिकायत पत्र और आंखों में अपने आशियाने को वापस पाने की उम्मीद लिए यह परिवार प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहा है।
यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है। कागजों पर न्याय मिलने के बावजूद यदि पीड़ित परिवार अपने घर में रहने का अधिकार नहीं पा रहा है, तो आमजन के मन में न्याय व्यवस्था को लेकर चिंता स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब प्रभावी हस्तक्षेप कर पीड़ित परिवार को उसका अधिकार और आशियाना वापस दिला पाता है।




