इंदौर। इंदौर के चर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने बुधवार को मेघालय के शिलॉन्ग स्थित अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट में सरेंडर के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 23 जुलाई को दिए गए आदेश के तहत सोनम को तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में सरेंडर करने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय-सीमा पूरी होने से पहले ही उसने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को मेघालय हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द करते हुए कहा था कि केवल गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कथित तकनीकी खामियों के आधार पर जमानत देना उचित नहीं था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी पूरी तरह न देना और उनमें कुछ कमियां होना अलग-अलग स्थितियां हैं। संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के कारण बताना आवश्यक है, लेकिन इस मामले में गिरफ्तारी के आधार पूरी तरह छिपाए नहीं गए थे।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेशन और जस्टिस पी.बी. वरेले की पीठ ने यह भी कहा था कि सोनम ने मजिस्ट्रेट के समक्ष गिरफ्तारी के आधार और संबंधित दस्तावेज प्राप्त होने की पुष्टि की थी। ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर राहत देना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि गिरफ्तारी प्रक्रिया में कोई कमी हो तो जांच एजेंसी दोबारा गिरफ्तारी कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय में ट्रायल पूरा नहीं होता है तो सोनम दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है। अदालत ने यह भी माना कि मुकदमे की सुनवाई शुरू हो चुकी है और इस चरण में आरोपी का जमानत पर बाहर रहना ट्रायल को प्रभावित कर सकता है।
सोनम के आत्मसमर्पण पर मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने मेघालय सरकार का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें अब न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। मामले में मेघालय सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा था।




