भोपाल, 22 अप्रैल । मध्य प्रदेश में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य में 27 अप्रैल को एक दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र बुलाया गया है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा होगी। इस बीच सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दल कांग्रेस एक-दूसरे पर जनता को गुमराह करने के आरोप लगा रहे हैं।
यह बहस अब संसद से निकलकर राज्य की राजनीति में पहुंच गई है, जहां नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी हो रही है। जैसे-जैसे सत्र की तारीख नजदीक आ रही है, भोपाल में विवाद बढ़ता जा रहा है और महिला आरक्षण राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, ''भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर भ्रम पैदा कर रही है। कांग्रेस हमेशा से विधानसभाओं में महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में रही है।''
उन्होंने कहा, ''अगर सरकार वास्तव में महिला आरक्षण को लेकर गंभीर है, तो इसे तुरंत लागू करना चाहिए और इसे परिसीमन (डिलिमिटेशन) या अन्य शर्तों से नहीं जोड़ना चाहिए। कांग्रेस पहले भी इस बिल का समर्थन कर चुकी है और आगे भी करती रहेगी।''
कांग्रेस नेता ने विशेष सत्र बुलाने के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक बताया। उन्होंने कहा, ''सिर्फ राजनीतिक संदेश देने के लिए विशेष सत्र बुलाना सही नहीं है। विधानसभा में महंगाई, बेरोजगारी और राज्य के अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।''
यह विशेष सत्र राज्यपाल मंगुभाई पटेल की मंजूरी के बाद संविधान के अनुच्छेद 174(1) के तहत बुलाया गया है। विधानसभा की बैठक 27 अप्रैल को सुबह 11 बजे भोपाल में होगी।
वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सत्र में महिला आरक्षण बिल और उससे जुड़े संवैधानिक व नीतिगत मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने दोहराया कि सरकार राजनीतिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
हाल ही में यह बिल लोकसभा में आगे नहीं बढ़ सका, जिसके बाद देशभर में इस पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर बिल को रोकने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि इसके लागू होने के लिए परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं पर सहमति जरूरी है।
आगामी विधानसभा सत्र में भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। भाजपा जहां महिला सशक्तीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाएगी, वहीं कांग्रेस सत्र के समय और उद्देश्य पर सवाल उठाने की तैयारी में है।



