इंदौर,रविकांत वर्मा। इंदौर में मानव तस्करी जैसे गंभीर और संवेदनशील अपराध के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए पुलिस कमिश्नरेट ने ‘महा-चौपाल’ का आयोजन किया। शहर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस एक दिवसीय सेमिनार में कानून प्रवर्तन एजेंसियों, विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने मिलकर तस्करी के बदलते स्वरूप और उससे निपटने की रणनीतियों पर मंथन किया।

कार्यक्रम की शुरुआत पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। स्वागत उद्बोधन एडिशनल सीपी आर.के. सिंह ने दिया। इसके बाद सेमिनार में शामिल वक्ताओं ने मानव तस्करी की जमीनी हकीकत, चुनौतियों और समाधान पर विस्तार से चर्चा की।


मुख्य वक्ता रिटायर्ड आईपीएस डॉ. पीएम नैयर और पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मानव तस्करी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब यह अपराध केवल भौतिक स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और तकनीक के माध्यम से भी फैल रहा है। ऐसे में पुलिस को भी अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाते हुए तकनीक आधारित पुलिसिंग को अपनाना होगा।


सेमिनार में विभिन्न सत्रों के दौरान विशेषज्ञों ने पीड़ितों के रेस्क्यू, पुनर्वास और समाज में पुनर्समावेशन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई। महिला सुरक्षा शाखा की डीआईजी डॉ. किरण लता केरकेट्टा और ‘मदद’ एनजीओ के संस्थापक राजेश मणि ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पीड़ितों को केवल बचाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी उतना ही जरूरी है।


इस दौरान पुलिस और गैर-सरकारी संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने एक साझा रोडमैप तैयार करने की बात कही, जिससे तस्करी के मामलों में त्वरित कार्रवाई और प्रभावी जांच सुनिश्चित की जा सके। कार्यक्रम में डीसीपी राजेश व्यास, आनंद कालादागी, कुमार प्रतीक, एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सेमिनार का संचालन डीसीपी सीमा अलावा ने किया।

यह आयोजन मानव तस्करी के खिलाफ एक मजबूत सामूहिक प्रयास के रूप में सामने आया, जिसमें पुलिस और समाज ने मिलकर इस अपराध के खिलाफ लड़ाई को और तेज करने का संकल्प लिया।