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अब वैश्वक टकराव बढ़ने की आशंका

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5 जनवरी 2026, 09:55 am IST
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वेनेजुएला वर्तमान में एक अभूतपूर्व राजनीतिक और सैन्य संकट के दौर से गुजर रहा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अमेरिका और रूस को एक बार फिर सीधा प्रतिद्वंद्वी बना दिया है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के परिणामस्वरूप वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ हिरासत में ले लिया गया है। वर्तमान में उन्हें न्यूयॉर्क की एक जेल में रखा गया है, जहाँ उन पर नार्को-टेररिज्म, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोकीन की तस्करी और अवैध हथियारों से संबंधित गंभीर आपराधिक मामलों में मुकदमा चलाया जाएगा। गौरतलब है कि अमेरिका ने मादुरो की गिरफ्तारी पर 15 मिलियन डॉलर का इनाम पहले ही घोषित कर रखा था।


इस नाटकीय घटनाक्रम के बीच वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के रूस पहुँचने की खबरों ने वैश्विक राजनीति में हलचल तेज कर दी है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, रोड्रिगेज रूस में राजनीतिक शरण और सैन्य समर्थन की तलाश में हैं। उन्होंने एक ऑडियो संदेश जारी कर अमेरिकी कार्रवाई को अपहरण करार दिया और मांग की कि राष्ट्रपति मादुरो की सुरक्षा और उनके जीवित होने के पुख्ता प्रमाण दिए जाएं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मादुरो ही देश के एकमात्र संवैधानिक प्रमुख हैं। दूसरी ओर, वेनेजुएला की सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने एक बड़ा आदेश जारी करते हुए राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में डेल्सी रोड्रिगेज को ही कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त कर दिया है, ताकि देश की संप्रभुता और प्रशासनिक ढांचा बना रहे।


अमेरिका ने वेनेजुएला के भविष्य को लेकर अपनी योजना स्पष्ट कर दी है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जब तक एक सुरक्षित और व्यवस्थित लोकतांत्रिक सत्ता परिवर्तन सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक वेनेजुएला का नियंत्रण अस्थायी रूप से अमेरिका के पास रहेगा। इस योजना के तहत अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों और वहां के जर्जर हो चुके बुनियादी ढांचे को पुनर्जीवित करने का कार्य करेंगी।यह स्थिति अब केवल वेनेजुएला का आंतरिक मामला नहीं रह गई है। रूस, चीन और कई अन्य देशों ने अमेरिकी हस्तक्षेप की तीखी आलोचना की है।


रूस में उपराष्ट्रपति रोड्रिगेज की मौजूदगी और वहां से मिल रहे समर्थन को राष्ट्रपति पुतिन की इस संकट में सीधी भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है। कराकस में हुई इस सैन्य कार्रवाई के दौरान कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले हुए और पूरी राजधानी की बिजली गुल कर दी गई थी। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वेनेजुएला अमेरिका के प्रभाव में जाएगा या रूस और चीन के सहयोग से वहां कोई नया प्रतिरोध खड़ा होगा। यह संकट आने वाले समय में नई भू-राजनीतिक जंग का आधार बन सकता है।

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