लखनऊ, 17 अप्रैल । बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि इन पार्टियों ने सत्ता में रहते हुए एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के अधिकारों को लागू करने में गंभीरता नहीं दिखाई, जबकि अब राजनीतिक लाभ के लिए इन वर्गों की बात कर रही हैं।उन्होंने कहा कि इन वर्गों को ऐसे दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से सावधान रहकर अपने अधिकारों और आत्मनिर्भरता पर ध्यान देना चाहिए। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के माध्यम से कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी व ओबीसी के संवैधानिक व कानूनी अधिकारों के प्रति कांग्रेस का रवैया हमेशा ढुलमुल रहा है। मायावती ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण में इन वर्गों की भागीदारी की बात करने वाली कांग्रेस ने केंद्र की सत्ता में रहते हुए कभी भी इनका आरक्षण कोटा पूरा करने की गंभीर पहल नहीं की। उन्होंने कांग्रेस को अवसरवादी पार्टी करार दिया।
उन्होंने कहा कि ना ही ओबीसी समाज हेतु मंडल कमीशन की रिपोर्ट के हिसाब से उन्हें सरकारी नौकरी व शिक्षा के क्षेत्र में 27 प्रतिशत आरक्षण को भी लागू किया, जिसे फिर बसपा के अथक प्रयासों से पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार में लागू किया गया था, जो सर्वविदित है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, यू.पी. में पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का लाभ देने के लिए, पिछड़ा वर्ग आयोग की जुलाई 1994 में ही आई रिपोर्ट को भी सपा सरकार ने ठंडे बस्ते में डालकर इसे लागू नहीं किया था, जिसे फिर यहां बी.एस.पी. की दिनांक 3 जून सन् 1995 में पहली बनी सरकार ने इसे तुरन्त लागू किया, जो कि अब यही सपा अपना रंग बदलकर अपने राजनीतिक स्वार्थ में इनकी महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की बात कर रही है।
बसपा मुखिया ने कहा कि इस प्रकार, अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी सपा जब सरकार में नहीं है तो अलग रवैया अपना रही है, किंतु जब सरकार में होती है तो अलग संकीर्ण जातिवादी व तिरस्कारी रवैया अपनाती है। अतः इन सभी वर्गों को ऐसी सभी छलावा एवं दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा सावधान रहना होगा, तभी कुछ बेहतर संभव हो पाएगा। उन्होंने कहा कि जहां तक महिला आरक्षण के लिए पिछली (सन् 2011) जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का सवाल है, तो इस बारे में यही कहना है कि यदि इसे जिन भी कारणों से जल्दी लागू करना है तो फिर इसी जनगणना के आधार पर करना है और यदि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी केंद्र की सत्ता में होती तो फिर यह पार्टी भी भाजपा की तरह ही यही कदम उठाती।
मायावती ने कहा कि कुल मिलाकर, कहने का तात्पर्य यह है कि देश में एससी, एसटी व ओबीसी एवं मुस्लिम समाज के वास्तविक हित, कल्याण व उनके भविष्य संवारने आदि के किसी भी मामले में कोई भी पार्टी गम्भीर नहीं रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मामले में इन वर्गों को अभी जो कुछ भी मिलने वाला है, तो उसे इनको फिलहाल स्वीकार कर लेना चाहिये और इस मामले में आगे अच्छा वक्त आने पर इनके हितों का सही से पूरा ध्यान रखा जायेगा, अर्थात् इन्हें किसी के भी बहकावे में नहीं आना है क्योंकि इनको खुद अपने पैरों पर खड़े होकर अपने समाज को आत्मनिर्भर एवं मजबूत बनाना है। यही सलाह है।

