पश्चिम बंगाल में भीषण आग: दो गोदाम जलकर खाक, 8 की मौत; कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना जिले में सोमवार तड़के दो गोदामों में भीषण आग लगने से कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद कई मजदूरों के लापता होने की आशंका जताई जा रही है। दमकल की 12 गाड़ियों ने करीब 7 घंटे की मशक्कत के बाद सुबह 10 बजे आग पर काबू पाया, हालांकि कुछ हिस्सों में देर शाम तक धुआं और लपटें उठती रहीं।
पुलिस के अनुसार आग सुबह करीब 3 बजे लगी। शाम करीब 5 बजे तीन शव बरामद किए गए, जिसके बाद तलाशी अभियान के दौरान पांच और शव मिले। बारुईपुर पुलिस जिला के एसपी शुभेंदु कुमार ने बताया कि सभी शव बुरी तरह झुलसे हुए हैं, जिससे उनकी पहचान करना फिलहाल संभव नहीं हो पाया है।
गोदाम में एक डेकोरेटिंग कंपनी और एक लोकप्रिय मोमो चेन के मजदूर काम करते थे। बताया जा रहा है कि मजदूर वहीं बने अस्थायी कमरों में रहते थे। चार मजदूरों ने समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। मृतक और लापता मजदूर पुरबा मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना जिलों के निवासी बताए जा रहे हैं।
शुरुआत में 6 मजदूरों के लापता होने की सूचना थी, लेकिन परिजनों का दावा है कि यह संख्या 10 से अधिक हो सकती है। बीजेपी विधायक अशोक डिंडा ने आरोप लगाया कि आधी रात को गोदाम का मुख्य गेट बंद था, जिस वजह से कई मजदूर बाहर नहीं निकल सके।
दीवारें तोड़कर निकाला गया धुआं
राज्य के बिजली मंत्री आरूप बिस्वास ने बताया कि अंदर फंसे लोगों की स्थिति घना धुआं हटने के बाद ही साफ हो पाएगी। इसके लिए कोलकाता नगर निगम की डिमोलिशन टीम को बुलाकर दीवारें तोड़ी गईं, ताकि धुआं बाहर निकल सके।
दमकल मंत्री का बयान
फायर सर्विस मंत्री सुजीत बोस ने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और मौके पर हाई-मास्ट लाइटें लगाई गई हैं। फायर सेफ्टी को लेकर उन्होंने कहा कि साल में दो बार फायर ऑडिट होता है, लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन कराना गोदाम मालिकों और कंपनी अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार पर असंवेदनशीलता और आपदा प्रबंधन में तालमेल की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी घटना के वक्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी गणतंत्र दिवस की छुट्टी मना रहे थे।
पहले भी हो चुका है बड़ा हादसा
गौरतलब है कि पिछले साल 30 अप्रैल 2025 को मध्य कोलकाता के एक होटल में आग लगने से 14 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए मुआवजा देने की घोषणा की थी।
