श्योपुर,उत्तम सिंह | देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव के ‘जीरो टॉलरेंस’ आदेशों के बावजूद श्योपुर में चंबल नदी का सीना आज भी अवैध उत्खनन से छलनी हो रहा है। हाल ही में मुरैना में वन रक्षक हरिकेश गुर्जर की शहादत के बाद भी प्रशासन की सुस्ती गंभीर सवाल खड़े कर रही है। क्या श्योपुर प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
मामले में 13 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने चंबल में अवैध उत्खनन पर स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद 16 मार्च को मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने श्योपुर कलेक्टर, एसपी और डीएफओ की आपात बैठक लेकर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। श्योपुर-ढोढर मार्ग और नहर रोड पर आज भी रेत से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बेखौफ दौड़ती नजर आ रही हैं। नहर किनारे अवैध डंपिंग यार्ड बना दिए गए हैं, जहां से बड़े पैमाने पर रेत की सप्लाई शहरों तक की जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि ये ट्रॉलियां रघुनाथपुर, ढोढर और मानपुर जैसे इलाकों से होते हुए कई पुलिस थानों और चौकियों को पार कर शहर में प्रवेश कर रही हैं। दुर्गापुरी चौकी और थाना देहात की सीमाओं को लांघते हुए ये वाहन कोतवाली क्षेत्र तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या नाकों पर तैनात अमला लापरवाह है या फिर मिलीभगत का खेल चल रहा है?
मुरैना में वन रक्षक हरिकेश गुर्जर की निर्मम हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, लेकिन श्योपुर में हालात जस के तस बने हुए हैं। चंबल सेंचुरी, जो वन्यजीवों के लिए सुरक्षित मानी जाती है, अब माफियाओं का अड्डा बनती जा रही है। कलेक्टर और एसपी श्योपुर से लेकर वन विभाग तक कई सवाल खड़े हो रहे हैं—सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या जिम्मेदारों पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन कब तक कार्रवाई करता है या फिर किसी और ‘हरिकेश’ की शहादत का इंतजार किया जाएगा।

