छतरपुर (रोहित पाठक)। बागेश्वर धाम में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार को सेवा और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। लगातार सातवें वर्ष आयोजित हो रहे इस विशाल सामूहिक विवाह समारोह में आज 305 कन्याओं का कन्यादान किया जा रहा है। इस महोत्सव की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें अर्जेंटीना, चिली, पेरू, उरुग्वे, इक्वाडोर, कोलंबिया, पनामा, भारत और दक्षिण अफ्रीका सहित कुल 9 देशों के राजदूत और राजनयिक विशेष रूप से सम्मिलित हुए हैं।
मंच पर पूज्य गुरुदेव जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज के साथ-साथ सनातनी लोकेश मुनी जी, दीदी मां ऋतंभरा जी, दाती जी महाराज, चिदानंद मुनी जी, संजय कृष्ण सलिल, मृदुलकांत जी महाराज, नेपाल से आए स्वामी अरुण आनंद जी महाराज, हनुमानगढ़ी के राजूदास महाराज जैसे संतों की उपस्थिति ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया है।
इस मौके पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज ने एक ऐसी घोषणा की, जिससे पूरे पंडाल में उत्साह की लहर दौड़ गई। उन्होंने कहा कि "इस बार मैं इन बेटियों की शादी के लिए आया हूँ, लेकिन अब मैं 29 जून से 13 जनवरी तक कठिन एकांतवास में जा रहा हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि अगले साल जब मैं यहाँ लौटकर आऊंगा, तो वह अवसर धीरेंद्र शास्त्री की अपनी शादी का होगा।"
धाम में अंतरराष्ट्रीय सद्भाव की तस्वीर भी दिखी, जहाँ एक नेपाली जोड़ा विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस विवाह को भारत और नेपाल की साझी विरासत का प्रतीक बनाते हुए दोनों देशों के पुजारियों ने मिलकर संपन्न कराया। नेपाल से आए 50 बारातियों की मौजूदगी में दोनों देशों के रीति-रिवाजों से हुई इस शादी ने 'बेटी-रोटी' के सदियों पुराने रिश्तों को और भी मजबूती प्रदान की है।
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समारोह के दौरान बेहद भावुक कर देने वाले पल तब आए, जब पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी स्वयं दूल्हा-दुल्हन से मिलने पहुंचे। अपने 'सरकार' को सामने देख कई जोड़े भावुक होकर रो पड़े और उनके चरणों में गिरकर आशीर्वाद लेने लगे। धीरेंद्र शास्त्री जी ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया और सुखी जीवन का आशीर्वाद दिया। व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए वरमाला की रस्म के दौरान दूल्हा-दुल्हन को 30-30 की संख्या में समूहों में मंच पर बुलाया जा रहा है, ताकि हर जोड़े को उचित सम्मान और समय मिल सके।
इस आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को भी जोड़ दिया है, जहाँ नेपाल से आया एक जोड़ा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस जोड़े की शादी भारतीय और नेपाली दोनों रीति-रिवाजों से संपन्न कराई जा रही है, जिसमें दोनों देशों के पुजारी मौजूद हैं। नेपाल से आए 50 बारातियों की मौजूदगी और दोनों संस्कृतियों के मिलन ने इस विवाह महोत्सव को और भी खास बना दिया है। नवनीत राणा जैसी हस्तियों और विश्व भर के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में बागेश्वर धाम की यह सेवा परंपरा आज वैश्विक पटल पर अपनी चमक बिखेर रही है।


देखिए कार्यक्रम की तस्वीरें...


विदेशी मेहमानों के साथ नाचते हुए बागेश्वर महाराज

बेटियों को 30 हजार रुपए की एफडी देते हुए बागेश्वर महाराज

मंच से भजन गाते हुए बागेश्वर महाराज, इंद्रेश जी महाराज और अनिरुद्धाचार्य जी









