ताशकंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने रविवार को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके तहत भूवैज्ञानिक खोज, खनन, खनिज प्रसंस्करण और एकीकृत मूल्य श्रृंखला विकसित करने के लिए संयुक्त परियोजनाओं को लागू किया जाएगा।दोनों नेताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और संभावित निवेश परियोजनाओं के क्रियान्वयन के क्षेत्रों में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए हुई चर्चाओं का स्वागत किया।
भारत-उज्बेकिस्तान संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने भूविज्ञान, खनन, परमाणु ऊर्जा, औद्योगिक सहयोग तथा महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई। इसमें खनिज संसाधनों के प्रसंस्करण, मूल्यवर्धित उत्पादों के उत्पादन और रीसाइक्लिंग से जुड़ी पहल वाली परियोजनाएं भी शामिल हैं।
संयुक्त बयान में कहा गया, "दोनों नेताओं ने उज्बेकिस्तान में संभावित खनिज भंडारों के विकास में भारतीय कंपनियों की भागीदारी और भारत में संयुक्त सहयोग के लिए उज्बेक उद्यमों को प्रोत्साहित करने में रुचि व्यक्त की। नेताओं ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के क्षेत्र में विस्तारित सहयोग में भी रुचि जताई।"
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने दोनों देशों के बीच हुए समझौतों और व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन के उद्देश्य से उच्चस्तरीय समन्वय और निगरानी प्रदान करने के लिए विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक तंत्र स्थापित करने पर सहमति जताई।
दोनों नेताओं ने संसदीय कूटनीति की बढ़ती भूमिका को स्वीकार किया और दोनों देशों की संसदों के बीच बढ़ते संपर्कों का स्वागत किया। इसमें संसदीय मैत्री समूहों के बीच सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय अंतर-संसदीय संगठनों के भीतर बातचीत भी शामिल है।
दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट रूप से निंदा की। उन्होंने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई और किसी भी आधार पर आतंकवाद को उचित ठहराने को खारिज किया।




