छतरपुर/नौगांव, कमल यादव। नौगांव कृषि उपज मंडी को स्वतंत्र मंडी का दर्जा मिले करीब 15 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद किसानों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। मंडी के विकास और निर्माण कार्यों पर अब तक 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने की बात सामने आ रही है, इसके बावजूद मंडी में नियमित व्यापारिक गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं।
तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में नौगांव को उपमंडी से स्वतंत्र मंडी का दर्जा दिया गया था। इसके बाद बिलहरी के पास 30 एकड़ से अधिक भूमि पर मंडी परिसर विकसित किया गया। यहां पहुंच मार्ग, सीसी रोड, बाउंड्रीवॉल, कार्यालय, दुकानें, पोस्ट ऑफिस और रेस्ट हाउस सहित कई निर्माण कार्य कराए गए।
हालांकि हाल ही में करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए 10 दुकानों, रेस्ट हाउस और स्टाफ क्वार्टर सहित अन्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। बारिश के दौरान सीसी रोड के उखड़ने और भवनों की छतों से पानी रिसने की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले कराए गए कई निर्माण कार्य भी समय के साथ क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंडी को कागजों में चालू रखने के लिए समय-समय पर औपचारिक बोली प्रक्रिया कराई जाती है, लेकिन किसानों और व्यापारियों को नियमित मंडी जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। मंडी तक पहुंचने वाली सड़क और परिसर की आंतरिक सड़कों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है।
लोगों ने मंडी के निर्माण और विकास पर खर्च हुई राशि, स्वीकृत कार्यों, निर्माण की गुणवत्ता तथा मंडी संचालन की स्थिति की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्यों में निर्धारित मानकों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि किसानों को मंडी की मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।




