छतरपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पत्नी द्वारा कथित व्यभिचार (अडल्ट्री) से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर विचार किए बिना दिए गए भरण-पोषण के आदेश को निरस्त कर दिया है। नई दिल्ली निवासी युवक द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डीडी बंसल की एकलपीठ ने छतरपुर फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत पत्नी को 6 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति द्वारा प्रस्तुत सीडी, कॉल ट्रांसक्रिप्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की प्रासंगिकता और सत्यता की पड़ताल किए बिना भरण-पोषण तय करना कानूनी रूप से सही नहीं है।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और सीडी की अनदेखी पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
याचिकाकर्ता पति की ओर से अधिवक्ता परमानंद साहू ने तर्क दिया कि पत्नी के कई अन्य पुरुषों के साथ अवैध संबंध थे, जिसे साबित करने के लिए फैमिली कोर्ट में सीडी, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और उनके लिखित ट्रांसक्रिप्ट पेश किए गए थे। फैमिली कोर्ट ने शुरुआत में सीडी को सेकेंडरी एविडेंस के रूप में दर्ज तो किया, लेकिन बाद में बिना किसी ठोस विधिक आधार के उसे मुख्य साक्ष्य (एग्जिबिट) के तौर पर स्वीकार करने से रोक दिया और भरण-पोषण का आदेश पारित कर दिया। हाईकोर्ट ने इस प्रक्रियात्मक चूक को रेखांकित करते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 14 अदालतों को न्यायहित में तकनीकी साक्ष्य नियमों से परे जाकर प्रासंगिक सामग्री पर विचार करने की शक्ति देती है।
सीआरपीसी की धारा 125(4) का उल्लेख: व्यभिचार साबित होने पर नहीं मिलता गुजारा भत्ता
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125(4) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यदि पत्नी व्यभिचार में रह रही हो, तो वह पति से भरण-पोषण प्राप्त करने की हकदार नहीं होती। ऐसे में जब पति ने व्यभिचार से जुड़े गंभीर आरोप लगाते हुए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत में दाखिल किए हैं, तो उनकी सत्यता, विश्वसनीयता और स्वीकार्यता की गहन पड़ताल अनिवार्य हो जाती है। कोर्ट ने कहा कि इन साक्ष्यों को सीधे दरकिनार नहीं किया जा सकता और साथ ही पत्नी को भी इन सबूतों का खंडन करने तथा अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
मामला दोबारा छतरपुर फैमिली कोर्ट भेजा, 16 सितंबर को पेशी
उच्च न्यायालय ने पूरे प्रकरण को नए सिरे से गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने के लिए छतरपुर फैमिली कोर्ट वापस भेज दिया है। फैमिली कोर्ट को निर्देशित किया गया है कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित विधि सिद्धांतों के प्रकाश में सीडी, ट्रांसक्रिप्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच करे और दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी कर नया आदेश पारित करे। दोनों पक्षों को 16 सितंबर 2026 को छतरपुर फैमिली कोर्ट में हाजिर होने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक पति को अंतरिम व्यवस्था के तौर पर 6 हजार रुपये प्रति माह का भुगतान जारी रखना होगा।




