किराये की लूट पर सरकार की 'सर्जिकल स्ट्राइक', सरकारी बसें बनेंगी MP की नई लाइफलाइन

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भोपाल। मध्य प्रदेश की परिवहन व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने प्रदेश में सरकारी बस सेवा को दोबारा शुरू करने का जो ऐतिहासिक निर्णय लिया है, उसने निजी बस संचालकों के खेमे में खलबली मचा दी है। पिछले कई दशकों से निजी बस ऑपरेटरों का प्रदेश के परिवहन मार्गों पर एकछत्र राज रहा है, लेकिन अब सरकार आम जनता को इस एकाधिकार से मुक्ति दिलाकर एक सुरक्षित और पारदर्शी विकल्प देने की तैयारी में है। सरकार के इस कदम को आम नागरिकों के हित में एक क्रांतिकारी पहल माना जा रहा है।
वर्तमान में प्रदेश के भीतर यात्रा करने वाले यात्रियों को निजी बस ऑपरेटरों की मनमानी का सामना करना पड़ता है। अक्सर देखा गया है कि त्यौहारों और छुट्टियों के सीजन में ये ऑपरेटर यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूलते हैं। किराये पर कोई प्रभावी सरकारी नियंत्रण न होने के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसके अलावा, स्टाफ का व्यवहार भी अक्सर विवादों और शिकायतों का केंद्र रहता है। कंडक्टर्स और ड्राइवरों द्वारा यात्रियों के साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग एक सामान्य बात बन गई है, जिससे विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को सफर के दौरान अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ता है।
परिवहन के क्षेत्र में सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है, जिसे निजी ऑपरेटर अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। सड़कों पर दौड़ रही अधिकांश निजी बसें पुरानी, जर्जर और खराब रखरखाव वाली हैं। अधिक मुनाफे के लालच में बस संचालक बसों की नियमित सर्विसिंग और फिटनेस पर ध्यान नहीं देते, जिससे आए दिन तकनीकी खराबी के कारण सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। यात्रियों की सुरक्षा से हो रहे इस खिलवाड़ ने सरकार को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जर्जर बसों के संचालन और ड्राइवरों की लापरवाही के कारण होने वाले हादसों ने आम जनता के मन में भय पैदा कर दिया है, जिसका समाधान अब सरकारी बस सेवा के रूप में देखा जा रहा है।
सरकारी हस्तक्षेप से क्या होगा...?
सरकारी बस सेवा शुरू होने का सबसे बड़ा लाभ यात्रियों को आर्थिक रूप से मिलेगा। जब सरकार खुद मैदान में उतरेगी, तो किराये का एक मानक ढांचा तैयार होगा। सरकारी बसों का किराया तर्कसंगत और पारदर्शी होगा, जिससे निजी ऑपरेटरों को भी अपनी दरें कम करने या नियंत्रित करने पर मजबूर होना पड़ेगा। टिकट बुकिंग की व्यवस्था ऑनलाइन और डिजिटल होने से भ्रष्टाचार और 'ओवरचार्जिंग' की संभावना खत्म हो जाएगी। यह प्रतिस्पर्धा सीधे तौर पर यात्रियों के पक्ष में जाएगी और उन्हें एक सस्ता और भरोसेमंद परिवहन विकल्प उपलब्ध कराएगी।
सरकार इस बार पुरानी व्यवस्थाओं को पीछे छोड़कर आधुनिक और सुरक्षित बसों के संचालन पर जोर दे रही है। नई सरकारी बसों में जीपीएस ट्रैकिंग, सीसीटीवी कैमरे और बेहतर आपातकालीन सुविधाओं की योजना बनाई गई है। सरकारी बसें फिटनेस के मानकों पर खरी उतरेंगी और उनके ड्राइवरों के लिए विशेष प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। व्यवस्थित समय होने से यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाने में आसानी होगी और उन्हें घंटों बस स्टैंड पर इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह नई और सुरक्षित व्यवस्था सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के साथ-साथ यात्रा के अनुभव को सुखद और तनावमुक्त बनाएगी।
अब मुनाफे पर भारी पड़ेगा जनता का हित
मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम साफ तौर पर इस ओर इशारा कर रहा है कि राज्य में अब निजी मुनाफे से ऊपर 'जनता का हित' रहेगा। निजी बस संचालक अपनी असुरक्षा के चलते इस योजना का विरोध जरूर कर रहे हैं, लेकिन साफ-सुथरी बसें, कम किराया और जवाबदेह प्रशासन ही प्रदेश के परिवहन का भविष्य है। सरकार की यह पहल न केवल निजी क्षेत्र के एकाधिकार को समाप्त करेगी, बल्कि आम नागरिकों को सम्मानजनक और सुलभ यात्रा का उनका मौलिक अधिकार भी दिलाएगी।


