लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल को लेकर सरकार ने अपनी निगरानी और क्रियान्वयन व्यवस्था को और मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई समग्र शिक्षा कार्यकारी समिति की बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत 11,902.85 करोड़ रुपये के बजट का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने, विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब के प्रभावी इस्तेमाल तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में सेवा प्रदाता के माध्यम से राज्य परियोजना कार्यालय और जिला परियोजना कार्यालयों में कार्यरत कार्मिकों के मानदेय में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इन कार्मिकों के मानदेय में वर्ष 2020 के बाद कोई वृद्धि नहीं हुई थी।
सरकार के इस फैसले से लंबे समय से मानदेय वृद्धि की प्रतीक्षा कर रहे कार्मिकों को राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भारत सरकार के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड से स्वीकृत समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना और बजट का पूरा उपयोग हो। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में केवल धनराशि खर्च करना ही लक्ष्य न हो, बल्कि उसका सीधा लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। बैठक में विद्यालयों में उपलब्ध स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, उपकरणों और अन्य संसाधनों के नियमित अनुश्रवण पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान की प्रयोगशालाओं में पर्याप्त उपकरण उपलब्ध कराने और विद्यार्थियों से उनका प्रभावी उपयोग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि बच्चों का समग्र विकास हो सके। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 में समग्र शिक्षा के तहत उपलब्ध धनराशि के उपयोग में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय सुधार हुआ। इस दौरान 9,425.21 करोड़ रुपये, यानी उपलब्ध धनराशि का 92.46 प्रतिशत खर्च किया गया। वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 69.60 प्रतिशत था।
सरकार ने अब वर्ष 2026-27 में स्वीकृत 11,902.85 करोड़ रुपये का पूरा उपयोग करने का लक्ष्य रखा है। बैठक में निपुण भारत मिशन के विस्तार को भी महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में सामने रखा गया। अभी बाल वाटिका से कक्षा-2 तक विद्यार्थियों में आधारभूत भाषायी और गणतीय दक्षताओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है। अब परिषदीय विद्यालयों में कक्षा-3 से 5 तक भी मिशन का विस्तार करते हुए हिंदी, गणित, अंग्रेजी और पर्यावरण विषयों के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
मुख्य सचिव ने अभिभावकों को भी जागरूक करने के निर्देश दिए, ताकि यूनिफॉर्म के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से उपलब्ध कराई जा रही धनराशि का उपयोग निर्धारित यूनिफॉर्म खरीदने में किया जाए और बच्चे स्कूल में निर्धारित वर्दी में ही आएं। बैठक में बताया गया कि मंत्रिपरिषद से अनुमोदन के बाद ड्रीम लैब की स्थापना के लिए टाटा टेक्नोलॉजी, जापानी कंपनी यास्कावा और अन्य उद्योग समूहों के साथ विभाग का समझौता ज्ञापन हो चुका है। इसके अलावा राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के स्कूल सेफ्टी ऑडिट के लिए कार्यदायी संस्था का चयन भी किया जा चुका है।
बैठक में सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ तकनीक, प्रयोगशाला, खेल और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। सरकार का फोकस अब स्वीकृत बजट को समयबद्ध तरीके से खर्च करने के साथ उसके परिणामों को विद्यालय और विद्यार्थियों के स्तर पर दिखाई देने वाला बनाने पर है।




