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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों को लेकर अमेरिका के कई शहरों में प्रदर्शन, लोग बोले-चुप रहना कोई विकल्प नहीं

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PeptechTime
1 फ़रवरी 2026, 10:30 am IST
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वॉशिंगटन। बांग्लादेश में चुनाव से पहले हालात चिंतापूर्ण बने हुए हैं। अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा चरम पर है। हालात को लेकर पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जाहिर की जा चुकी है। इस बीच हिंदू अमेरिकियों ने बांग्लादेश में हिंदुओं और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यकों पर टारगेटेड हमलों पर विरोध दर्ज कराया है।


अमेरिका के कई शहरों में शांतिपूर्ण रैलियां और प्रार्थना सभाएं की गईं। लोगों ने अमेरिका में कानून बनाने वालों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से इस मामले में कार्रवाई करने की अपील की।


प्रिंसटन, लॉस एंजिल्स, शिकागो, बे एरिया, डेट्रॉइट और टैम्पा समेत कई शहरों में प्रदर्शन की खबरें आईं। रैली के आयोजकों ने कहा कि मिलकर किए गए विरोध प्रदर्शनों का मकसद जागरूकता बढ़ाना और जवाबदेही तय करने पर जोर देना था।


प्रिंसटन की एक रैली में एक प्रवक्ता ने कहा कि लोग बांग्लादेशी हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यकों के समर्थन में इकट्ठा हुए थे, जो बांग्लादेश में नरसंहार से गुजर रहे हैं और पिछले साल से 3,000 से ज्यादा हमले होने का दावा किया है।


प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब बोलने का समय है। अब रुकने का समय है। डेट्रॉइट में प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में हो रही हिंसा को क्रमिक नरसंहार बताया और कहा कि हिंदुओं को टारगेट किया जा रहा है और समर्थकों से कानून बनाने वालों को बुलाने, लोकल स्तर पर एकजुट होने और वॉशिंगटन के एक कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की।


9 फरवरी को वॉशिंगटन में कांग्रेस की सार्वजनिक सुनवाई तय की गई है। लॉस एंजिल्स में प्रवक्ता ने प्रार्थना के साथ नागरिकों से एक्शन की अपील भी की। एक स्पीकर ने भीड़ से कहा, “प्लीज चुप न रहें।”


उत्तर अमेरिका के हिंदुओं के गठबंधन से जुड़े एक शख्स ने कहा कि आयोजकों ने लोगों को चुने हुए अधिकारियों से संपर्क करने में मदद करने के लिए एक ऑनलाइन पिटीशन बनाई है।


एफआईए-शिकागो और नेशनल इंडिया हब ने कहा, “मासूम हिंदुओं पर सिर्फ उनकी धार्मिक पहचान के कारण बेरहमी से हमला किया जा रहा है। चुप्पी और निष्क्रियता सिर्फ नरसंहार को बढ़ावा देती है।”


एफआईए-शिकागो और नेशनल इंडिया हब ने इलिनोइस के शॉमबर्ग में एक प्रदर्शन आयोजित किया था। आयोजकों ने कहा कि बोस्टन, ह्यूस्टन और लॉस एंजिल्स में भी इसी तरह के कार्यक्रम हुए थे और फरवरी में अमेरिकी कैपिटल में कांग्रेस की सुनवाई होनी है। हिंदूपैक्ट समेत मानवाधिकार और हिंदू वकालत करने वाले समूह के एक गठबंधन ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों का मकसद बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों की बुरी हालत को दिखाना और पॉलिसी पर ध्यान दिलाना था।


बे एरिया में रैली के दौरान शुरुआती बयान में कहा गया कि यह आंदोलन एक ऐसा जमीनी आंदोलन बन गया है जो पहले कभी नहीं हुआ और एक तट से दूसरे तट तक फैला हुआ है। जब बेगुनाह जानें जाती हैं, तो चुप रहना कोई विकल्प नहीं है।”


--आईएएनएस

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