नई दिल्ली, 2 अप्रैल । हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. डीके सुनील ने गुरुवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से विशेष बातचीत में भारत के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों की प्रगति पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने तेजस एमके-1ए की डिलीवरी, इंजन सप्लाई, एसयू-57, तेजस एमके-2, प्रचंड हेलीकॉप्टर और वैश्विक घटनाओं के प्रभाव पर महत्वपूर्ण बयान दिए।डॉ. सुनील ने बताया कि तेजस एमके-1ए कार्यक्रम में अच्छी प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा, "आज के दिन तक हमने तेजस एमके-1ए के 21 एयरक्राफ्ट तैयार कर लिए हैं। हमारे पास पांच इंजन उपलब्ध हैं और छठा इंजन भी आने वाला है। एयरक्राफ्ट हमने तैयार रखे हैं। डिजाइन और डेवलपमेंट में सिर्फ एक-दो आइटम बाकी हैं, जिन्हें हमें पूरा करना है।"
उन्होंने दिसंबर में भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के साथ हुई चर्चा का जिक्र करते हुए कहा, "हमने उन्हें बीवीआर मिसाइल, लेजर गाइडेड रॉकेट और रडार जैसे प्रमुख आइटम तैयार होने की जानकारी दी। रडार की रेंज बढ़ाने का काम अप्रैल में पूरा हो जाएगा। मई में वायुसेना के साथ फिर चर्चा होगी। पूरी उम्मीद है कि मई की बैठक में कुछ ठोस फैसला लिया जाएगा। उस समय हमारे पास छह एयरक्राफ्ट तैयार रहेंगे।"
इंजन सप्लाई पर डॉ. सुनील ने स्वीकार किया कि सप्लाई चेन में चुनौतियां हैं, जो कोविड और उसके बाद की स्थिति के कारण आई हैं। उन्होंने कहा, "जब एयरक्राफ्ट इस इंजन के आसपास डिजाइन किया गया है, तो विकल्प सीमित हैं। हम जीई के साथ लगातार संपर्क में हैं। कंपनी में नया मैनेजमेंट आया है, और टेस्टिंग में ऑटोमेशन बढ़ाया गया है। हमें विश्वास है कि स्थिति सही रास्ते पर है। इस साल जुलाई से दिसंबर तक 20 इंजन आने की उम्मीद है।"
180 तेजस एमके-1ए की डील पर उन्होंने कहा, "यह सौदा करीब सात साल में पूरा हो जाएगा। डिलीवरी की गति मुख्य रूप से इंजन सप्लाई पर निर्भर है।" उन्होंने आश्वासन दिया कि टेक्निकल कमेटी ने जांच पूरी कर ली है और निष्कर्ष पर पहुंच गई है। अगले सप्ताह तक यह एयरक्राफ्ट फिर से एक्शन में आ जाएगा।
पांचवीं पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट सु-57 पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया, "रूस की ओर से टेक्निकल स्टडीज हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि हम 50 प्रतिशत मौजूदा फैसिलिटी का उपयोग कर सकते हैं। बाकी नई फैसिलिटी के लिए रूस से निवेश की जरूरत है। इसके बाद हम वायुसेना को समय और लागत के बारे में बताएंगे। कुछ तकनीकी पहलू बाकी हैं, जिन्हें हम 2-3 महीने में पूरा कर लेंगे।"
इजरायली रडार सप्लाई पर वैश्विक तनाव (इजरायल-हमास और ईरान संघर्ष) के प्रभाव को लेकर डॉ. सुनील ने कहा, "इजरायल से रडार की सप्लाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। शुरुआत में कुछ प्रभाव था, लेकिन उनकी फैक्टरियां काम करती रहीं और समस्याएं कवर हो गईं। हमारे पास मौजूद सभी एयरक्राफ्ट के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है। फिलहाल कोई समस्या या पैनिक नहीं है।"
प्रचंड (एलएचसी) हेलीकॉप्टर पर उन्होंने अच्छी खबर दी। उन्होंने कहा, "कोस्ट गार्ड वाले टेक्निकल समस्या सॉल्व हो गई है। हम नए पार्ट के साथ गियरबॉक्स को मॉडिफाई करके डिप्लॉय कर रहे हैं। अगले दो महीनों में नेवी और कोस्ट गार्ड के सभी एयरक्राफ्ट ठीक हो जाएंगे और उड़ान भरने लगेंगे।"
डॉ. सुनील ने आगे बताया, "हमने 35 एल-31एफपी इंजन डिलीवर किए हैं। 15 प्रचंड हेलीकॉप्टर डिलीवर कर दिए गए हैं और 12 तैयार हैं, जो इस साल डिलीवर हो जाएंगे। वित्तीय रूप से एचएएल के सभी पैरामीटर मजबूत हैं।"
एचएएल चेयरमैन ने कुल मिलाकर आत्मनिर्भर भारत के रक्षा क्षेत्र में हो रही प्रगति पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि कंपनी स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने, सप्लाई चेन को मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

