इंदौर,रविकांत वर्मा। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर शहर में भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का अनूठा संगम देखने को मिला। गीताभवन चौराहे स्थित बाबा साहेब की प्रतिमा पर सुबह से ही श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों का तांता लगा रहा।
सुबह से ही विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में यहां पहुंचे और बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। आम नागरिकों में भी इस अवसर को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। लोग अपने परिवार के साथ पहुंचकर बाबा साहेब के विचारों को याद करते नजर आए।
इस आयोजन की सबसे खास बात किन्नर समाज की सक्रिय भागीदारी रही, जिसने पूरे कार्यक्रम को भावुक और प्रेरणादायक बना दिया। किन्नर समाज के सदस्यों ने पूरे श्रद्धा भाव के साथ बाबा साहेब की प्रतिमा का दुग्ध अभिषेक किया और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वातावरण जय भीम के नारों से गूंज उठा, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बन गया।
किन्नर समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि बाबा साहेब ने समाज के हर वर्ग को समान अधिकार दिलाने के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उन्होंने दलितों, वंचितों और उपेक्षित वर्गों को मुख्यधारा में लाने का जो कार्य किया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है। किन्नर समाज ने कहा कि उन्हें भी समाज में सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार बाबा साहेब के संघर्षों की देन है, इसलिए वे उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।
कार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता और समानता का संदेश प्रमुख रूप से सामने आया। वक्ताओं ने बाबा साहेब के विचारों को अपनाने और समाज में भाईचारे को बढ़ावा देने का आह्वान किया।पूरे आयोजन में अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। प्रशासन की मौजूदगी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
बाबा साहेब की जयंती पर उमड़े इस जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि आज भी उनके विचार और सिद्धांत समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके जीवनकाल में थे।


