वाशिंगटन, 13 अप्रैल । एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग और तेहरान का रिश्ता अब सिर्फ हथियार बेचने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अमेरिका के खिलाफ एक तरह की रणनीतिक साझेदारी बनता जा रहा है, जिसमें प्रॉक्सी, प्रतिबंधों से बचने के तरीके और सीधे सबूत न छोड़ने जैसी चीजें शामिल हैं।
ऐसा इसलिए क्योंकि तेहरान जितना ज्यादा अमेरिका की ताकत को उलझाए, मुश्किलें पैदा करेगा और उस पर खर्च बढ़ाएगा उतना ही फायदा चीन को होगा। ईरान की सीधी जीत से चीन को कोई लाभ नहीं होगा।
‘वन वर्ल्ड आउटलुक’ नाम की रिपोर्ट के अनुसार, चीन अब ईरान का सिर्फ दूर से समर्थन करने वाला देश नहीं रहा। अगर अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स सही हैं, तो चीन अब एक और ज्यादा खतरनाक दिशा में बढ़ रहा है। यानी ईरान को युद्ध के दौरान फिर से तैयार करने में सक्रिय मदद।
सीएनएन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इसमें कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि चीन आने वाले हफ्तों में ईरान को एयर-डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है, और इसके लिए वह तीसरे देशों का इस्तेमाल कर सकता है ताकि असली स्रोत छिपा रहे।
रिपोर्ट में कहा गया, “यह सिर्फ दिखावे की बात नहीं है, बल्कि असली ताकत की बात है। एयर-डिफेंस सिस्टम, एंटी-शिप मिसाइल और ऐसे इंडस्ट्रियल सामान जो दोहरे इस्तेमाल में आते हैं, ये सब युद्ध लड़ने का तरीका बदल सकते हैं। इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए इलाके में काम करना मुश्किल हो सकता है, निगरानी और हमले की योजनाएं जटिल हो सकती हैं, और ईरान को अपने नुकसान की भरपाई करने में मदद मिल सकती है। युद्ध में सिर्फ बहादुरी नहीं, बल्कि सप्लाई और रिप्लेसमेंट भी बहुत मायने रखते हैं। जो देश इन सप्लाई लाइनों को बहाल करने में मदद करता है, वह सिर्फ किनारे खड़ा नहीं होता, बल्कि नतीजों को प्रभावित करता है।”
रिपोर्ट ने यह भी कहा कि इन खबरों से वॉशिंगटन, यरुशलम और खाड़ी देशों के नीति-निर्माताओं को चिंता होनी चाहिए। चीन लंबे समय से खुद को एक व्यावहारिक ताकत के रूप में पेश करता रहा है, जो व्यापार, कूटनीति और स्थिरता को प्राथमिकता देता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी थिंक टैंक ‘अटलांटिक काउंसिल’ ने भी यह दर्ज किया है कि चीन ईरान को ड्रोन, मिसाइल और उनसे जुड़े पार्ट्स सप्लाई कर रहा है, जिससे लगता है कि यह कोई अचानक बदलाव नहीं बल्कि लगातार चलने वाला चैनल है।
इसमें बीबीसी की रिपोर्ट का भी जिक्र है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आरोप है कि चीन ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम में ट्रेनिंग और जरूरी पार्ट्स देकर मदद कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगर यह सब सच साबित होता है, तो इसे चीन की बढ़ती भूमिका में एक “खतरनाक बढ़ोतरी” माना जाएगा।

